Jharkhand GI Tag: झारखंड की समृद्ध कला, अनूठी संस्कृति और हस्तशिल्प के लिए एक ऐतिहासिक खबर है। राज्य के 11 पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग (Geographical Indication Tag) की मंजूरी मिल गई है। इस बड़ी उपलब्धि से न केवल स्थानीय कारीगरों और शिल्पियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी, बल्कि उनके लिए आर्थिक समृद्धि के नए द्वार भी खुलेंगे।
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नाबार्ड (NABARD) और झारक्राफ्ट के प्रयासों से इन उत्पादों की गुणवत्ता, विशिष्टता और ऐतिहासिक विरासत को अब कानूनी सुरक्षा मिल गई है। आइए जानते हैं कि झारखंड के किन 11 उत्पादों को यह खास सम्मान मिला है और इससे राज्य को क्या लाभ होगा।
झारखंड के जीआई टैग प्राप्त 11 उत्पादों की सूची (Jharkhand GI Tagged Products List)
पहले झारखंड से केवल सोहराय पेंटिंग को ही जीआई टैग हासिल था, लेकिन अब इस सूची में 11 और उत्पाद शामिल हो गए हैं:
- भगैया साड़ी और फैब्रिक (गोड्डा संताल का बगहिया ब्लॉक)
- कुचाई सिल्क साड़ी (सरायकेला का आदिवासी हस्तशिल्प)
- केसरिया कलाकंद (कोडरमा की प्रसिद्ध मिठाई)
- डोकरा क्राफ्ट (पारंपरिक धातु शिल्प)
- दुमका चादर और बडोनी पपेट्स
- मुंडा ज्वेलरी (पारंपरिक आदिवासी आभूषण)
- झारखंड बांस शिल्प (बैंबू क्राफ्ट)
- तसर सिल्क और साड़ियां
- जादोपटिया पेंटिंग (अति प्राचीन जनजातीय कला)
- पांची साड़ी और फैब्रिक
- झारखंड बेनाम हस्तशिल्प
कुचाई सिल्क और भगैया साड़ी को मिली अंतिम मंजूरी
झारक्राफ्ट द्वारा साल 2023 में गोड्डा के भगैया और सरायकेला के खास आदिवासी समुदायों द्वारा तैयार होने वाले कुचाई सिल्क को जीआई टैगिंग के लिए भेजा गया था। चेन्नई की विशेषज्ञ टीम ने रांची का दौरा कर इसका मूल्यांकन किया। लंबी कानूनी प्रक्रिया और बिना किसी आपत्ति के, अब इसे अंतिम मंजूरी दे दी गई है, जिसकी पुष्टि नाबार्ड ने भी की है।
इस मंजूरी के बाद आदिवासी इतिहास और विरासत का हिस्सा रही यह कला अब वर्तमान में एक बड़े ब्रांड के रूप में उभरेगी, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी।
5 अन्य उत्पाद भी कतार में: जल्द मिलेगी केंद्र सरकार से मंजूरी
झारखंड के 5 अन्य विशिष्ट उत्पादों को भी जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया अंतिम चरण (Pre-examination and Examination Category) में है। इनमें शामिल हैं:
- सिमडेगा की मीठी इमली
- सरायकेला-कुचाई की प्रसिद्ध हल्दी
- सिमडेगा का ‘बिरू गमछा’
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा इन उत्पादों के भौगोलिक संबंध और गुणवत्ता की गहन जांच के बाद जल्द ही अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
जीआई टैग (GI Tag) क्या है और यह कितने समय के लिए मिलता है?
भौगोलिक संकेत (GI) टैग एक विशेष चिन्ह है, जो किसी उत्पाद को उसकी विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति, अद्वितीय गुण या प्रतिष्ठा के आधार पर दिया जाता है। यह एक प्रकार का बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Right) है।
- यह टैग 10 साल के लिए मान्य होता है, जिसे बाद में रिन्यू कराया जा सकता है।
- जीआई टैग पाने के लिए आवेदकों को उत्पाद की ऐतिहासिक विरासत, विशिष्टता और ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने होते हैं।
कारीगरों और किसानों को कैसे मिलेगा आर्थिक लाभ?
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बेहतर कीमत और ब्रांड वैल्यू: जीआई टैग मिलने से बाजार में नकली उत्पादों पर रोक लगेगी। जैसे मुंडा ज्वेलरी या कुचाई सिल्क को अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सही कीमत और ब्रांड इक्विटी मिलेगी।
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कानूनी सुरक्षा: कोई भी बाहरी व्यक्ति या कंपनी इस नाम का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगी।
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पर्यटन और निर्यात को बढ़ावा: सरकार इन उत्पादों को वैश्विक मंचों पर प्रमोट करेगी, जिससे राज्य के पर्यटन और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
भारत में जीआई टैग का इतिहास (GI Tag History in India)
- जीआई टैग की अवधारणा विश्व व्यापार संगठन (WTO) द्वारा 1994 में शुरू की गई थी।
- भारत में जीआई टैग पाने वाला पहला उत्पाद दार्जिलिंग चाय है।
- हाल ही में ओडिशा की ‘काई चटनी’ को भी यह टैग मिला है।
- वर्तमान में देश के 650 से अधिक उत्पादों (जैसे- मिथिला मखाना, बनारसी साड़ी, कड़कनाथ मुर्गा और मैसूर सिल्क) को यह दर्जा मिल चुका है।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।








