Jharkhand News: उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की ज़मानत पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने को कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने न्यायिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में अहम कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी का उपकार नहीं, बल्कि संविधान के प्रति अदालत की जिम्मेदारी का निर्वहन है। हाल के दिनों में सामने आए कुछ आदेशों से आम लोगों के मन में न्यायपालिका को लेकर जो आशंकाएं पैदा हुई थीं, यह फैसला उन्हें दूर करने की कोशिश है।
राजेश ठाकुर का कहना है कि इस मामले में केवल ज़मानत रोकना ही काफी नहीं है। जिन लोगों ने ऐसे आदेशों की प्रक्रिया में भूमिका निभाई, उनकी जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही जरूरी है। जवाबदेही के बिना पीड़िता को संपूर्ण न्याय नहीं मिल सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय प्रणाली तभी मजबूत होगी, जब वह हर स्तर पर पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करे।
उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। सत्ता, रसूख या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर किसी अपराधी को राहत दिलाने की कोशिश संविधान की आत्मा के खिलाफ है। लोकतंत्र में कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए, चाहे व्यक्ति कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।
राजेश ठाकुर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह रुख यह संदेश देता है कि न्याय की राह में किसी भी तरह का दबाव स्वीकार्य नहीं है और पीड़ित की आवाज़ सबसे ऊपर है।

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