झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भारत निर्वाचन आयोग को एक विस्तृत पत्र लिखकर राज्यसभा चुनाव के दौरान कथित “हॉर्स ट्रेडिंग”, आर्थिक प्रलोभन और विधायकों पर दबाव बनाए जाने की आशंका जताई है।
JMM की ओर से 25 मई 2026 को भेजे गए इस पत्र में चुनाव आयोग से मांग की गई है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
यह पत्र पार्टी के केंद्रीय महासचिव की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित किया गया है। पत्र में विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है, जिससे विधायकों की खरीद-फरोख्त की संभावना बढ़ सकती है।
पत्र में क्या कहा गया?
JMM ने अपने पत्र में झारखंड विधानसभा की वर्तमान राजनीतिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा है कि विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।
पत्र के अनुसार:
- JMM के 34 विधायक
- कांग्रेस के 16 विधायक
- राजद (RJD) के 4 विधायक
- भाकपा (माले) के 2 विधायक
यानी कुल मिलाकर गठबंधन के पास 56 विधायक हैं।
पत्र में दावा किया गया है कि राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार की जीत के लिए न्यूनतम 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। ऐसे में गठबंधन आसानी से दो राज्यसभा सीटें जीत सकता है।
JMM ने यह भी कहा कि विधानसभा में भाजपा के केवल 24 विधायक हैं, लेकिन इसके बावजूद पार्टी द्वारा उम्मीदवार उतारने की सार्वजनिक घोषणा की जा रही है।
इसी आधार पर JMM ने आशंका जताई कि विपक्षी दल आर्थिक प्रलोभन, राजनीतिक दबाव या अन्य तरीकों से विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं।
चुनाव आयोग से क्या मांग की गई?
JMM ने चुनाव आयोग से मांग की है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान भ्रष्टाचार और अनैतिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाए।
पत्र में निम्न एजेंसियों को सक्रिय रखने की मांग की गई है:
- केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)
- प्रवर्तन निदेशालय (ED)
- राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI)
- केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)
- झारखंड एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB)
JMM ने कहा कि इन एजेंसियों को चुनाव अवधि के दौरान सतर्क मोड में रखा जाए ताकि किसी भी प्रकार के अवैध लेन-देन या दबाव की जांच तुरंत हो सके।
BJP पर अप्रत्यक्ष हमला
हालांकि पत्र में सीधे तौर पर किसी नेता पर आरोप नहीं लगाया गया, लेकिन इसमें नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू का उल्लेख किया गया है।
JMM का कहना है कि भाजपा नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से उम्मीदवार उतारने की घोषणा यह संकेत देती है कि पार्टी संख्या बल की कमी के बावजूद राजनीतिक रणनीति के तहत चुनाव मैदान में उतरना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि JMM का यह पत्र केवल चुनाव आयोग को सतर्क करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक संदेश भी है।
इस कदम के जरिए JMM अपने विधायकों को एकजुट रखने और विपक्ष पर नैतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
क्या है राज्यसभा चुनाव का गणित?
झारखंड विधानसभा में कुल 81 निर्वाचित और कुछ नामित सदस्यों को मिलाकर प्रभावी संख्या 84 मानी जाती है। राज्यसभा चुनाव में विधायकों द्वारा वोट डाले जाते हैं।
यदि किसी दल या गठबंधन के पास पर्याप्त विधायक संख्या हो, तो वह आसानी से अपने उम्मीदवार को जिता सकता है। लेकिन जब संख्या संतुलन कमजोर होता है, तब क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक जोड़-तोड़ की आशंकाएं बढ़ जाती हैं।
इसी कारण राज्यसभा चुनाव अक्सर राजनीतिक रणनीति और अंदरूनी समीकरणों का केंद्र बन जाते हैं।
झारखंड की राजनीति में पहले भी लगते रहे हैं खरीद-फरोख्त के आरोप
झारखंड की राजनीति में पहले भी हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप लगते रहे हैं। राज्यसभा चुनावों के दौरान कई बार विधायकों के कथित तौर पर प्रभावित होने के आरोप सामने आते रहे हैं।
2012 के राज्यसभा चुनाव के दौरान भी नकदी बरामदगी और कथित वोट खरीद मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय चुनाव आयोग को हस्तक्षेप करना पड़ा था और जांच एजेंसियां भी सक्रिय हुई थीं।
इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए JMM इस बार पहले से ही चुनाव आयोग को सतर्क करना चाहती है।
राजनीतिक संदेश क्या है?
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार इस पत्र के कई राजनीतिक मायने हैं:
1. गठबंधन को एकजुट रखने की कोशिश
JMM यह संदेश देना चाहती है कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और उसके पास स्पष्ट बहुमत है।
2. विपक्ष पर नैतिक दबाव
भाजपा पर अप्रत्यक्ष रूप से हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताकर JMM विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में लाना चाहती है।
3. संभावित क्रॉस वोटिंग रोकना
इस तरह का सार्वजनिक पत्र विधायकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनाता है ताकि कोई क्रॉस वोटिंग न हो।
4. चुनाव आयोग को पहले से अलर्ट करना
यदि चुनाव के दौरान कोई विवाद या आरोप सामने आते हैं, तो JMM यह दिखा सकेगी कि उसने पहले ही आयोग को आगाह कर दिया था।
BJP की संभावित प्रतिक्रिया
भाजपा की ओर से अभी इस पत्र पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इसे JMM की “डर की राजनीति” बता सकती है।
भाजपा यह तर्क दे सकती है कि राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारना किसी भी राजनीतिक दल का लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे हॉर्स ट्रेडिंग से जोड़ना उचित नहीं है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर नजर
अब सबकी नजर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर होगी। यदि आयोग इस पत्र को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त निगरानी या एजेंसियों को अलर्ट करने जैसे कदम उठाता है, तो इसका असर पूरे चुनावी माहौल पर पड़ सकता है।
राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनता मतदान से नहीं होते हों, लेकिन इन चुनावों के जरिए विधानसभा के भीतर की राजनीतिक ताकत और रणनीतिक एकजुटता साफ दिखाई देती है।
झारखंड में राज्यसभा चुनाव से पहले JMM का यह पत्र राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकता है। एक तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन अपने संख्या बल को लेकर आश्वस्त दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर संभावित हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका को सार्वजनिक कर विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति भी नजर आ रही है।
अब देखना होगा कि भाजपा इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देती है और चुनाव आयोग किस तरह की कार्रवाई करता है। आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति और अधिक दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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