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माँ दुर्गा के आगमन और सवारी का महत्व: जानें वार के अनुसार माँ दुर्गा की सवारी का रहस्य

जानिए माँ दुर्गा की सवारी शेर कैसे बना और नवरात्रि में वार के अनुसार उनके अलग-अलग वाहनों (हाथी, घोड़ा, पालकी, नाव) पर आगमन का क्या महत्व होता है।

अक्टूबर 10, 2026
in धर्म-अध्याय
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माँ दुर्गा की सवारी शेर और महिषासुर मर्दिनी का दिव्य रूप

सिंह (शेर) पर सवार होकर दुष्टों का संहार करतीं माँ दुर्गा का महिषासुर मर्दिनी रूप

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समय: ~6 मिनट•हिंदी बुलेटिन

माँ दुर्गा की सवारी शेर (सिंह) को पराक्रम, शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर शेर कैसे देवी दुर्गा का वाहन बना? और क्यों हर नवरात्रि में माता का आगमन अलग-अलग सवारी पर होता है?

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  • कहानी: कैसे बना शेर माँ दुर्गा की सवारी?
    • नवरात्रि में माँ दुर्गा का आगमन और उनकी सवारी का महत्व

आइए जानते हैं दुर्गा माता की सवारी शेर बनने की पौराणिक कथा और उनके आगमन के पीछे छिपे खास धार्मिक रहस्य।

📌 यह भी पढ़ें:
  • महालया पर ही क्यों बनाई जाती हैं मां दुर्गा की आंखें? जानें चक्षु दान का रहस्य
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कहानी: कैसे बना शेर माँ दुर्गा की सवारी?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ दुर्गा की सवारी शेर बनने के पीछे माता पार्वती की कठिन तपस्या और एक भूखे शेर के धैर्य की अद्भुत कहानी है:

  • माता पार्वती की कठिन तपस्या: भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने जंगलों में कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। इस दौरान वे पूरी तरह भगवान की भक्ति में लीन थीं।
  • भूखे शेर का आगमन: तपस्या के बीच ही वहां एक भूखा-प्यासा शेर आया। वह देवी पार्वती को अपना शिकार बनाने के इरादे से वहां बैठ गया।
  • शेर का धैर्य और प्रतीक्षा: माता पार्वती की तपस्या कई वर्षों तक चलती रही और वह शेर भी वहीं चुपचाप बैठा रहा। उसने न तो देवी पर हमला किया और न ही वहां से हटा। वह भी माँ के साथ एक तरह से तपस्या में लीन हो गया।
  • माँ का वरदान और ‘शेरावाली‘ नाम: जब भगवान शिव प्रकट हुए और माता पार्वती की तपस्या पूरी हुई, तो उन्होंने देखा कि शेर भी उनके साथ इतने वर्षों से भूखा बैठा रहा। शेर के इस धैर्य और रक्षा भाव से प्रसन्न होकर माता ने उसे अपना आधिकारिक वाहन (सवारी) बना लिया। तभी से माँ दुर्गा को ‘शेरावाली माँ’ कहा जाने लगा।

नवरात्रि में माँ दुर्गा का आगमन और उनकी सवारी का महत्व

पंचांग और शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि का पर्व किस वार (दिन) से शुरू हो रहा है, उससे यह तय होता है कि दुर्गा माता का आगमन किस सवारी पर होने वाला है। हर वाहन का देश, समाज और प्रकृति पर अलग प्रभाव पड़ता है:

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हाथी (गज) पर आगमन

जब नवरात्रि की शुरुआत रविवार या सोमवार से होती है, तो माँ दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं।

  • महत्व: हाथी पर आगमन को सबसे शुभ माना जाता है। यह देश में सुख-समृद्धि, शांति, अच्छी वर्षा और फसलों की पैदावार का संकेत देता है।

घोड़े पर आगमन

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अगर नवरात्रि शनिवार या मंगलवार से शुरू हो रही है, तो माता रानी का वाहन घोड़ा होता है।

  • महत्व: घोड़े को युद्ध और गति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घोड़े पर आगमन से राजनीतिक उथल-पुथल, प्राकृतिक आपदाएं या तनाव की स्थिति बन सकती है।

डोली (पालकी) पर आगमन

जब नवरात्रि का पहला दिन बुधवार या शुक्रवार होता है, तो माता का आगमन डोली (पालकी) में होता है।

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  • महत्व: पालकी पर माता के आने को बहुत अच्छा नहीं माना जाता। यह समाज में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, महामारी या आर्थिक मंदी का संकेत देता है।

नाव (नौका) पर आगमन

यदि नवरात्रि का आरंभ गुरुवार के दिन से होता है, तो माँ दुर्गा नाव पर सवार होकर पृथ्वी पर आती हैं।

  • महत्व: नाव पर आगमन को बेहद कल्याणकारी माना जाता है। यह संकेत देता है कि माता अपने भक्तों के सभी कष्टों को पार लगा देंगी और उनकी हर मनोकामना पूरी होगी।

माँ दुर्गा की सवारी शेर हमें शक्ति और अनुशासन की सीख देती है। वहीं, नवरात्रि में माता का अलग-अलग वाहनों पर आगमन प्रकृति के बदलावों और आने वाले समय के प्रति सचेत करता है। चाहे माता का वाहन कोई भी हो, सच्ची श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा हमेशा भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आती है।

Ritika Singh
Ritika Singh

कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।

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