नई दिल्ली/भुवनेश्वर: भगवान जगन्नाथ पर आधारित एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ (Mahaprabhu Jagannath) को लेकर विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुँच गया है। फिल्म में भगवान जगन्नाथ के कथित कार्टून रूप और कुछ काल्पनिक दृश्यों को लेकर उठे विरोध के बीच ओडिशा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इस फिल्म की देशव्यापी रिलीज पर रोक लग सकती है?
धार्मिक भावनाओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के बीच यह मामला अब एक बड़े कानूनी विवाद का रूप ले चुका है।क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत फिल्म के ट्रेलर और उसमें भगवान जगन्नाथ के चित्रण को लेकर हुई। ओडिशा सरकार, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और कई धार्मिक संगठनों का आरोप है कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ को एनिमेटेड कार्टून शैली में दिखाया गया है और कुछ ऐसे काल्पनिक दृश्य शामिल किए गए हैं, जिनका धार्मिक ग्रंथों या पारंपरिक मान्यताओं से कोई संबंध नहीं है।
विरोध करने वालों का कहना है कि इस तरह का चित्रण करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है।ओडिशा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में ओडिशा सरकार ने कहा है कि फिल्म के कुछ दृश्य राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ सकते हैं।
पहले क्या फैसला दिया था सुप्रीम कोर्ट ने?
इससे पहले 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी।
अदालत ने कहा था कि “आस्था मन के भीतर होती है” और इसी आधार पर रथ यात्रा के बाद फिल्म की ऑल इंडिया रिलीज की अनुमति दी गई थी।
क्या फिल्म की रिलीज पर लग सकती है रोक?
फिलहाल फिल्म पर कोई नई रोक नहीं लगाई गई है।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई स्वीकार किए जाने के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि अदालत आगे क्या फैसला देती है। यदि सुनवाई के दौरान अदालत को लगे कि विवादित सामग्री से गंभीर सार्वजनिक विवाद या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है, तो वह अंतरिम आदेश भी जारी कर सकती है।
हालांकि अंतिम निर्णय अब सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर निर्भर करेगा।
मामला क्यों है इतना संवेदनशील?
भगवान जगन्नाथ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। विशेष रूप से ओडिशा में उनका धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व बेहद गहरा है।
ऐसे में धार्मिक प्रतीकों को फिल्मों या अन्य माध्यमों में किस प्रकार प्रस्तुत किया जाए, यह विषय पहले भी कई बार विवाद का कारण बन चुका है। इस मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि रचनात्मक स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। और पढ़ें: जब रातों-रात ढह गया था रांची का जगन्नाथपुर मंदिर… आज भी लोग भूल नहीं पाए वो मंजरअभी क्या है स्थिति?
- ओडिशा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
- फिल्म के चित्रण पर धार्मिक संगठनों ने गंभीर आपत्ति जताई है।
- सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई करेगा।
- फिल्म पर फिलहाल कोई नई रोक नहीं लगी है।
- अंतिम फैसला अदालत की अगली सुनवाई के बाद सामने आएगा।
‘महाप्रभु जगन्नाथ’ फिल्म को लेकर शुरू हुआ विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुँच चुका है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल इस फिल्म की रिलीज ही नहीं, बल्कि धार्मिक आस्थाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। फिलहाल सभी की नजरें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
(नोट: यह खबर उपलब्ध न्यायिक जानकारी और सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। मामले में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।)डिजिटल एडिटर एवं टेक्निकल हेड, खबर मन्त्र। डिजिटल मीडिया, वेब जर्नलिज्म और पब्लिशिंग सिस्टम्स के साथ झारखंड और राष्ट्रीय समाचारों का डिजिटल संपादन।









