पेपर लीक से पहले: सब कुछ सामान्य लग रहा था
3 मई 2026 को देशभर में NEET-UG परीक्षा हुई. मेडिकल में दाखिले का सपना देख रहे करीब 22 से 24 लाख छात्र इस परीक्षा में बैठे. सब कुछ सामान्य लग रहा था, जब तक कि परीक्षा के कुछ दिन बाद अजीब शिकायतें सामने नहीं आने लगीं. 7 मई के आसपास खबरें फैलनी शुरू हुईं कि “गेस पेपर” के नाम पर बांटे जा रहे कुछ सवाल असल परीक्षा के सवालों से हूबहू मिल रहे थे. यानी पेपर पहले ही लीक हो चुका था. इसका नतीजा तेज़ी से सामने आया —- 12 मई: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी. साथ ही CBI को जांच सौंप दी गई.
- 15 मई: खुद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस ब्रीफिंग में स्वीकार किया कि लीक हुआ है. उनके अनुसार, यह गड़बड़ी “कमांड चेन” में हुई एक चूक की वजह से हुई थी.
जब सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी ने जन्म दिया एक आंदोलन को
अब यहां कहानी एक दिलचस्प मोड़ लेती है, जिसे शायद उस वक्त किसी ने गंभीरता से नहीं लिया था. 15-16 मई को सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी वायरल हो गई, जिसमें उन्होंने “कॉकरोच” शब्द का इस्तेमाल किया था. इसी टिप्पणी से प्रेरित होकर 16 मई को अभिजीत दिपके नाम के एक व्यक्ति ने मजाक-मजाक में एक “पार्टी” बना डाली — कॉकरोच जनता पार्टी (CJP). शुरुआत में यह सिर्फ एक इंटरनेट जोक जैसा लगा. लेकिन जैसे ही NEET रद्द होने की खबर फैली, यही मंच युवाओं के गुस्से का सबसे बड़ा आउटलेट बन गया. एक व्यंग्य पेज से यह असली, संगठित छात्र आंदोलन में बदलने लगा.जून: सड़कों पर उतरा गुस्सा, भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक
- 6 जून: CJP ने दिल्ली के जंतर मंतर पर अपना पहला बड़ा प्रदर्शन किया. मांगें साफ थीं — धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, परीक्षा प्रणाली में सुधार हो, और पेपर लीक तनाव के चलते जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा मिले.
- 20 जून: प्रदर्शन अनिश्चितकालीन धरने में बदल गया. इसी दौरान जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े और भूख हड़ताल पर बैठ गए — जो करीब 26 दिनों तक चली.
- 21 जून: NEET की दोबारा परीक्षा कराई गई. नतीजे जल्द ही घोषित भी कर दिए गए (बाद में 16 जुलाई को अंतिम नतीजे जारी हुए), लेकिन इससे सड़कों पर उबल रहा गुस्सा शांत नहीं हुआ.
जुलाई: टकराव अपने चरम पर
जुलाई का महीना इस पूरे विवाद का सबसे तनावपूर्ण दौर साबित हुआ. 20 जुलाई को CJP ने “चलो संसद” नाम से एक बड़े मार्च का ऐलान किया. पुलिस ने इजाजत नहीं दी, फिर भी हजारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ चले. नतीजा — लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले, और कई घायल प्रदर्शनकारी. इसके बावजूद जंतर मंतर पर धरना जारी रहा. इसी बीच विपक्ष भी मैदान में कूद पड़ा. कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च किया, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. विपक्ष की तीन मांगें थीं — प्रधान का इस्तीफा, 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई की जांच, और छात्रों से सार्वजनिक माफी. संसद का मॉनसून सत्र भी इसी हंगामे की भेंट चढ़ गया. रोज विपक्षी सांसद वेल में जाकर नारेबाजी करते और “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” के नारे लगाते, जिसकी वजह से लोकसभा और राज्यसभा दोनों बार-बार स्थगित करनी पड़ीं.प्रधानमंत्री का वीडियो संदेश
23 जुलाई की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई होगी, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे, और जल्द ही एक कड़ा बिल कैबिनेट के सामने लाया जाएगा. 24 जुलाई को उन्होंने एक और वीडियो संदेश जारी कर सीधे युवाओं को संबोधित किया.कैबिनेट की मंजूरी और आखिरी बातचीत
24 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान वाले ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी — जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा का प्रावधान शामिल है. उसी दिन CJP के दो प्रतिनिधि, सौरव दास और आशुतोष रंका, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह से दूसरी बार मिले. CJP ने अपनी तीन मांगें दोहराईं:- Dharmendra Pradhan इस्तीफा दें या हटाए जाएं — इस पर कोई समझौता नहीं.
- आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा मिले.
- प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस लिए जाएं और 20 जुलाई की कार्रवाई के लिए माफी मांगी जाए.
25 जुलाई: वो दिन, जब इस्तीफा आ ही गया
आखिरकार शनिवार, 25 जुलाई 2026 को करीब दोपहर दो बजे धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया. जनता के नाम अपने दो पन्नों के पत्र में उन्होंने लिखा कि हाल के घटनाक्रम ने उन्हें “गहरी पीड़ा” पहुंचाई है, और छात्रों का भविष्य किसी राजनीतिक टकराव का शिकार नहीं बनना चाहिए. उन्होंने अपने चार दशक के शिक्षा से जुड़े सफर को भी याद किया — एक छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के पैरोकार के तौर पर. इस्तीफे की खबर आते ही जंतर मंतर पर जश्न का माहौल बन गया. CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा — “हमने यह कर दिखाया. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. और यह इस्तीफा इस बात का सबूत है कि अगर आप डरें नहीं, इस सरकार के आगे न झुकें, तो किसी का भी इस्तीफा लिया जा सकता है.” सोनम वांगचुक ने इसे “प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत” बताया, जबकि आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने इसे “लोकतंत्र की बड़ी जीत” करार दिया. हालांकि, अभिजीत दिपके ने साफ किया कि यह सिर्फ आधी जीत है. उन्होंने दो और मांगें दोहराईं — आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये की सहायता, और 20 जुलाई के लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई.आगे क्या? अभी भी कई सवाल बाकी हैं
- नया शिक्षा मंत्री कौन होगा?, यह अभी तय नहीं हुआ है.
- जंतर मंतर पर धरना अब भी जारी है, क्योंकि CJP की बाकी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं.
- संसद में गतिरोध अब भी बना हुआ है, और नए पेपर लीक विरोधी बिल पर बहस अगले हफ्ते होने की उम्मीद है.
- सरकार ने अगले साल से NEET को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) फॉर्मेट में कराने का भी संकेत दिया है, ताकि पारदर्शिता बढ़े.
निचोड़: एक मीम पार्टी ने सिखाया सत्ता को सबक
CJP की कहानी दिखाती है कि आज के दौर में राजनीतिक दबाव सिर्फ बड़े दलों या संसद के गलियारों से नहीं, बल्कि इंटरनेट के किसी कोने से शुरू हुए एक मजाक से भी बन सकता है. जो बात विपक्ष हफ्तों की संसद-ठप्पेबाजी से हासिल नहीं कर पाया, वो एक सोशल मीडिया मूवमेंट, एक भूख हड़ताल और लाखों नाराज छात्रों की एकजुटता ने कर दिखाया. अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार बाकी बची मांगों पर क्या रुख अपनाती है, और क्या नया पेपर लीक विरोधी कानून वाकई परीक्षा प्रणाली में भरोसा लौटा पाएगा.
विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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