इस्तीफे के बाद भी तय नहीं हुआ अंतरिम प्रधानमंत्री
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे को 48 घंटे हो चुके हैं। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अंतरिम प्रधानमंत्री कौन बनेगा। सत्ता का यह खालीपन देश को गहरी राजनीतिक अस्थिरता की ओर धकेल रहा है। राजधानी काठमांडू में सेना ने हालात संभालने के लिए कर्फ्यू लगा रखा है, लेकिन बढ़ती हिंसा और विरोध प्रदर्शन स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।
सुशीला कार्की का नाम, लेकिन संसद भंग पर विवाद
अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का नाम सबसे आगे है। हालांकि, यह सहमति संसद भंग करने के मुद्दे पर अटक गई है। राष्ट्रपति पौडेल संसद को भंग करने के खिलाफ हैं, जबकि कार्की का कहना है कि गैर-सांसद को प्रधानमंत्री बनाने से पहले संसद का भंग होना ज़रूरी है। यही मतभेद सरकार गठन की सबसे बड़ी बाधा बन गया है।
Gen-Z आंदोलनकारी और प्रधानमंत्री की दावेदारी
इस संकट में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं Gen-Z प्रदर्शनकारी। लेकिन ये भी एकजुट नहीं हैं।
- करीब 10 अलग-अलग गुट अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
- सभी गुट केवल काठमांडू के मेयर बालेन शाह पर सहमत हैं, लेकिन बालेन प्रधानमंत्री बनने को तैयार नहीं।
- सुशीला कार्की के नाम पर गुटों के बीच मतभेद है। कुछ उन्हें “भारत समर्थक” कहकर विरोध कर रहे हैं।
सेना और राजनीतिक दलों की मुश्किलें
सेना चाहती है कि प्रदर्शनकारी एक नाम तय करके आगे बढ़ाएं, लेकिन बातचीत में राजनीतिक दलों और राजावादी नेताओं को शामिल करने से Gen-Z गुट नाराज हो गए हैं। सेना के लिए यह तय करना मुश्किल है कि इतने बिखरे गुटों में से किसे प्रतिनिधि माना जाए।
राजनीतिक दल बनाम Gen-Z
नेपाल की सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियां संसद भंग करने के खिलाफ हैं और मौजूदा संविधानिक ढांचे में ही नई सरकार बनाना चाहती हैं। दूसरी ओर, Gen-Z आंदोलनकारी मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह बदलने पर जोर दे रहे हैं। यही खींचतान प्रधानमंत्री पद पर सहमति बनने में सबसे बड़ी रुकावट है।
निष्कर्ष: नेपाल में प्रधानमंत्री पर अनिश्चितता
नेपाल इस समय गहरे गतिरोध में फंसा है। प्रधानमंत्री पद पर सहमति न बनने के कारण हिंसा और अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। सेना, राजनीतिक दल और प्रदर्शनकारियों के बीच सहमति बने बिना नेपाल में स्थिर अंतरिम सरकार का गठन लगभग असंभव दिखाई देता है। अगर जल्दी समाधान नहीं निकला तो यह संकट और गहरा सकता है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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