National News: संसद का मानसून सत्र 2025 आज से शुरू हो गया है और यह सत्र 21 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान कुल 21 बैठकें निर्धारित हैं. सत्र की शुरुआत से पहले ही सियासी पारा चढ़ चुका है. विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है, खासकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को लेकर.
प्रधानमंत्री देंगे मीडिया को संबोधन
सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मीडिया को संबोधित करेंगे. हालांकि, विपक्ष की मांग के बावजूद ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार की ओर से बयान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह देंगे. राज्यसभा में इस मुद्दे पर विपक्ष को सवाल पूछने की अनुमति दी गई है.
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का तीखा रुख
रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा. कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री से संसद में सीधा जवाब देने की मांग की. बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने की, जिसमें 54 नेता शामिल हुए. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भी बैठक में मौजूद रहे.
“प्रधानमंत्री आमतौर पर सत्र में रहते हैं”: किरेन रिजिजू
सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ऑपरेशन सिंदूर समेत सभी विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने विपक्ष की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री विदेश यात्रा को छोड़कर अधिकतर समय संसद सत्र के दौरान मौजूद रहते हैं, लेकिन उनसे पूरे समय सदन में रहने की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए.”
नए और लंबित विधेयक होंगे पेश
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस मानसून सत्र में 8 नए और 9 लंबित विधेयक संसद में पेश किए जाएंगे. सरकार का कहना है कि वह विपक्ष के सहयोग से सत्र को सुचारू रूप से चलाना चाहती है. रिजिजू ने उम्मीद जताई कि यह सत्र उत्पादक और सकारात्मक रहेगा.
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छोटे दलों को भी मिलेगा बोलने का मौका
छोटे दलों द्वारा बोलने के लिए पर्याप्त समय की मांग पर रिजिजू ने भरोसा दिलाया कि सभी दलों को उचित समय मिलेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी बहस से भाग नहीं रही, लेकिन हर चर्चा संसदीय नियमों के तहत ही होगी.
पहले दिन से ही सियासी टकराव के संकेत
सत्र की शुरुआत से ही राजनीतिक गर्मी अपने चरम पर है. जहां सरकार इसे ऐतिहासिक और प्रभावी सत्र बनाने का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष पूरी रणनीति के साथ हमलावर है. आने वाले दिनों में संसद का यह सत्र कई अहम राजनीतिक घटनाक्रमों का गवाह बन सकता है.











