Ranchi: राजधानी रांची के धुर्वा स्थित ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ मंदिर में वार्षिक रथयात्रा महोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। मंदिर परिसर में रथ निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है। धार्मिक परंपरा के अनुसार 29 जून को देव स्नान यात्रा के साथ उत्सव की शुरुआत होगी।
स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा एक पक्ष (15 दिन) तक अनासर काल में रहेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन नहीं होंगे और भगवान एकांतवास में रहेंगे।
15 जुलाई को होगा नेत्रदान, 16 जुलाई को निकलेगी रथयात्रा
धार्मिक परंपरा के अनुसार 15 जुलाई को भगवान का नेत्रदान (नेत्रोत्सव) संपन्न होगा। इसके अगले दिन 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इसी दिन से धुर्वा में लगने वाले 10 दिवसीय पारंपरिक मेले का भी शुभारंभ होगा।
रांची का धुर्वा स्थित जगन्नाथ मंदिर वर्ष 1691 में बनवाया गया था। लगभग 250 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर का पुनर्निर्माण वर्ष 1991 में कराया गया। यहां हर वर्ष पुरी की तर्ज पर भव्य रथयात्रा का आयोजन होता है, जिसमें झारखंड ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
10 दिनों तक गुलजार रहेगा धुर्वा का मेला
रथयात्रा के साथ शुरू होने वाला 10 दिवसीय मेला रांची की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है। मेले में रांची, देवघर, दुमका सहित पश्चिम बंगाल से भी मिठाई और अन्य सामान के दुकानदार पहुंचते हैं। यहां तीर-धनुष, मांदर-ढोलक, कृषि उपकरण, घरेलू सामान, झूले और बच्चों के मनोरंजन के कई आकर्षण मौजूद रहते हैं। हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस मेले में शामिल होते हैं।
इस बार मेले का बेस प्राइस 1.05 करोड़ रुपये
मेला आयोजन के लिए इस वर्ष टेंडर का बेस प्राइस 1 करोड़ 5 लाख रुपये रखा गया है। 29 जून को ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। पिछले तीन वर्षों से मेला टेंडर के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। वर्ष 2023 में टेंडर 75 लाख रुपये, 2024 में 1.92 करोड़ रुपये, जबकि 2025 में आपसी सहमति के कारण 51 लाख रुपये में टेंडर हुआ था। अब इस बार सभी की नजरें इस बात पर हैं कि मेला कितनी राशि में आवंटित होता है।








