Ranchi University(RU) का बड़ा कारनामा, 75 अंकों के पेपर का 100 में किया मूल्यांकन
Ranchi University : रांची विश्वविद्यालय (RU) में शैक्षणिक सत्र को नियमित करने की कोशिशों के बीच एक बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है। स्नातक (UG) सेमेस्टर-2 के जेनेरिक फिजिक्स (GE2B) के पेपर में मूल्यांकन के दौरान हुई गड़बड़ी ने विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Ranchi University : क्या है पूरा मामला?
नवनियुक्त वीसी प्रोफेसर सरोज शर्मा जहां एक ओर परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर परीक्षा विभाग ने एक ऐसी गलती की है जिसने छात्रों का भविष्य अधर में लटका दिया है।
जेनेरिक फिजिक्स का थ्योरी पेपर 75 अंकों का और प्रैक्टिकल 25 अंकों का होना था (कुल 100 अंक)। विश्वविद्यालय ने थ्योरी पेपर की कॉपियों की जांच 75 की जगह 100 अंकों के आधार पर कर दी। इसके बाद प्रैक्टिकल के 25 अंक अलग से जोड़ दिए गए, जिससे रिजल्ट का आधार 125 अंक हो गया।
गड़बड़ी का छात्रों पर असर: पास होने वाले भी हुए फेल
इस तकनीकी और प्रशासनिक गलती का सीधा असर छात्रों की मार्कशीट पर पड़ा है। मानकों के गलत होने के कारण कई छात्र, जो सामान्य परिस्थितियों में पास हो जाते, उन्हें ‘फेल’ घोषित कर दिया गया है।
इन मामलों में गड़बड़ी:
- अंकुर दीप (रोल: 23BS62100247): थ्योरी का मूल्यांकन 100 अंकों पर होने से इनका रिजल्ट 125 अंकों के आधार पर तैयार हुआ, जिससे प्रतिशत का गणित पूरी तरह बिगड़ गया।
- नीलेश राज (रोल: 23BS62100268): इनका थ्योरी पूर्णांक 100 मान लिया गया, जिससे उनका वास्तविक प्रतिशत कृत्रिम रूप से कम हो गया।
- नीतेश कुमार (रोल: 23BS62100269): यह सबसे चौंकाने वाला मामला है। नीतेश को थ्योरी में 29 और प्रैक्टिकल में 18 अंक मिले हैं। अगर 75 अंकों के आधार पर मूल्यांकन होता तो वह पास होते, लेकिन 100 के स्केल पर उन्हें फेल दिखा दिया गया।
Ranchi University में परीक्षा विभाग की कार्यशैली पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस घटना ने डिजिटल सिस्टम और वेरिफिकेशन प्रक्रिया की पोल खोल दी है। इस घटना के बाद सिलेबस की अनदेखी पर बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या परीक्षा नियंत्रक कार्यालय ने निर्धारित सिलेबस और मार्किंग स्कीम का पालन नहीं किया? क्या डिजिटल सिस्टम में अंकों का स्केल गलत फीड किया गया था? रिजल्ट पब्लिश होने से पहले क्या किसी स्तर पर डेटा की जांच नहीं की गई? और साथ ही इस भारी चूक के लिए कौन जिम्मेदार है, जिससे सैकड़ों छात्रों का परिणाम प्रभावित हुआ?
रांची विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। छात्रों और अभिभावकों की मांग है कि इस गड़बड़ी को जल्द से जल्द सुधारा जाए और संशोधित मार्कशीट जारी की जाए ताकि किसी भी छात्र का साल बर्बाद न हो।












