रांची: संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जन्म जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा घोषित ‘समरसता संकल्प अभियान‘ अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। जहां भाजपा इसे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का अभियान बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे दलित समाज को लेकर भाजपा की “राजनीतिक नौटंकी” करार दिया है। दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
भाजपा का दावा- समाज में समरसता का संदेश पहुंचाने का अभियान
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने प्रेसवार्ता में बताया कि भाजपा 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) से लेकर 20 फरवरी 2027 (संत रविदास जयंती) तक पूरे देश में ‘समरसता संकल्प अभियान‘ चलाएगी।
उन्होंने कहा कि अभियान के तहत 29 जुलाई को देशभर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर ‘समरसता दीप महोत्सव‘ आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर से कलश वंदन अभियान शुरू होगा, जबकि 5 अक्टूबर से 5 नवंबर तक जालंधर से वाराणसी तक समरसता यात्रा निकाली जाएगी।
अर्जुन मुंडा ने कहा कि संत रविदास ने समानता, भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश दिया था। भाजपा का उद्देश्य उनके विचारों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाकर समाज में समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक और राष्ट्र निर्माण का अभियान है, जिसमें सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
कांग्रेस का पलटवार- ‘समरसता नहीं, राजनीतिक पाखंड‘
भाजपा की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने इस अभियान पर तीखा हमला बोला।
प्रदेश सचिव एवं प्रवक्ता ऋषीकेश सिंह ने कहा कि देश और समाज को जाति और धर्म के आधार पर बांटने का आरोप झेल रही भाजपा अब सामाजिक समरसता का ढोंग कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा भाजपा को नकारे जाने के बाद अब दलित समाज को साधने के लिए संत रविदास के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि संविधान बदलने की बात करने वाले नेताओं को अब दलित समाज की याद आ रही है। उनके अनुसार, यदि भाजपा वास्तव में संत रविदास के विचारों का सम्मान करती है तो उसे सबसे पहले नफरत और विभाजन की राजनीति छोड़नी चाहिए।
ऋषीकेश सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस संत रविदास, डॉ. भीमराव आंबेडकर और बिरसा मुंडा जैसे महापुरुषों के विचारों को व्यवहार में उतारने में विश्वास रखती है, जबकि भाजपा केवल चुनावी राजनीति के लिए उनके नाम का उपयोग करती है।
बयान बनाम बयान, सियासत तेज
संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर शुरू होने जा रहे अभियान को लेकर झारखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर भाजपा इसे सामाजिक समरसता और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे चुनावी राजनीति और दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश बता रही है।
फिलहाल दोनों दल अपने-अपने दावों पर कायम हैं और इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है।
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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