सुदेश महतो ने कहा कि निशा भगत की मौत ने हेमंत सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उनके मुताबिक, निशा ने फेसबुक लाइव के दौरान राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने लाइव के दौरान थाना प्रभारी को फोन भी किया था। इसके बाद उनकी आत्महत्या की खबर सामने आई।
घटना को महज आत्महत्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए
आजसू प्रमुख ने सवाल उठाया कि आखिर एक आदिवासी महिला को अपनी बात रखने और न्याय की मांग करने के लिए इस हद तक क्यों जाना पड़ा? उन्होंने कहा कि इस घटना को महज आत्महत्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
महतो ने मांग की कि फेसबुक लाइव में लगाए गए आरोपों और घटना से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच हो। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि निशा भगत को न्याय मिलना चाहिए और उनकी मौत से जुड़े हर सवाल का जवाब सामने आना चाहिए। फिलहाल मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आने बाकी हैं।









