Ranchi: भगवान विश्वकर्मा, जिन्हें जगतगुरु और सृष्टि के प्रथम शिल्पकार कहा जाता है, की पूजा देशभर में बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ की जाती है। राजधानी रांची में भी विश्वकर्मा पूजा को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। इस अवसर पर झारखंड का सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक श्री जगतगुरु भगवान विश्वकर्मा मंदिर, जो महात्मा गांधी रोड स्थित विश्वकर्मा लेन में है, कल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहेगा।
मंदिर का है गौरवशाली इतिहास
यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि झारखंड की आस्था और परंपरा का प्रतीक है। इसका इतिहास लगभग 95 वर्षों पुराना है। वर्ष 1928 में संत मोनी बाबा ने यहां विश्वकर्मा भगवान की तस्वीर रखकर पूजा-अर्चना शुरू की थी। इसके बाद 1930 में विश्वकर्मा समाज ने इस मंदिर का निर्माण कराया और इसे मोनी बाबा को समर्पित किया। तभी से यहां मूर्ति स्थापित कर प्रतिवर्ष विधि-विधान से पूजा की परंपरा चलती आ रही है। लोगों का मानना है कि यह झारखंड का पहला और सबसे भव्य विश्वकर्मा मंदिर है, जहां प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है। मंदिर से जुड़ी मान्यताएं भी अत्यंत प्राचीन हैं—विश्वास है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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क्या है विश्वकर्मा पूजा का महत्व
विश्वकर्मा पूजा के दिन मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। विशेष रूप से नए वाहनों की पूजा-अर्चना यहां की एक अनोखी परंपरा है। हर वर्ष विश्वकर्मा पूजा पर यह मंदिर भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का मुख्य केंद्र बन जाता है। केवल रांची ही नहीं बल्कि आस पास के जिले में भारी मात्रा में यहां श्रद्धालु पहुंचते है और अपने वाहनों की पूजा अर्चना कराते है।
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कल है विशेष कार्यक्रम
इस बार मंदिर में विश्वकर्मा पूजा की 95वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। इसके लिए मंदिर को भव्य और आकर्षक रूप से सजाया गया है। सुबह 10:00 बजे – मंदिर के आचार्य पंडित राजाराम शास्त्री के द्वारा पूजन-अर्चन की जाएगी। जिसके बाद दोपहर 1:00 बजे – इस्कॉन मंदिर द्वारा भजन-कीर्तन होगा। 2:30 बजे से – महा भंडारा एवं प्रसाद वितरण और शाम 4:00 बजे से – सिर्फ पहाड़ी मंदिर से भोले की खोज संस्था द्वारा भजन प्रस्तुति की जाएगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, रांची के सांसद संजय सेठ, रांची विधायक सी.पी. सिंह, राज्यसभा सांसद महुआ मांझी और झारखंड प्रदेश विश्वकर्मा समाज के अध्यक्ष विकास राणा शामिल होंगे।
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हजारों श्रद्धालुओं के उत्साह का साक्षी बनेगा मंदिर
बता दें कि रांची का यह प्राचीन मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान ही नहीं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का अहम हिस्सा है। 95 वर्षों से निरंतर चली आ रही पूजा परंपरा यह साबित करती है कि आस्था और विश्वास की नींव समय के साथ और मजबूत होती जाती है। कल एक बार फिर यह मंदिर हजारों श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्ति का साक्षी बनेगा।












