Delhi: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP Protest के बीच एक खास पुलिस यूनिट चर्चा में आ गई है। महिलाओं की सुरक्षा से लेकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की भूमिका तक, इस यूनिट को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर पिंक फोर्स क्या है? इसकी शुरुआत सबसे पहले कहां हुई थी और इसे बनाने के पीछे क्या मकसद था? जानिए इस रिपोर्ट में।
CJP Protest के दौरान क्यों चर्चा में आई Pink Force?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जा रहा है। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से पिंक फोर्स की तैनाती की गई है।
प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। ऐसे में महिला पुलिसकर्मियों की विशेष टीम की तैनाती सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से अहम मानी जा रही है। इसी वजह से पिंक फोर्स को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है दिल्ली पुलिस की Pink Force?
पिंक फोर्स महिलाओं की सुरक्षा पर केंद्रित एक विशेष महिला पुलिस इकाई है। इसका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई में मदद करना और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है। इस तरह की पुलिस टीमों को उन जगहों पर तैनात किया जा सकता है, जहां महिलाओं की आवाजाही अधिक होती है या सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां सामने आती हैं। इनमें स्कूल, कॉलेज, बाजार, बस स्टैंड, मेट्रो स्टेशन और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थान शामिल हो सकते हैं।
छेड़छाड़, उत्पीड़न या महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी शिकायत मिलने पर ऐसी टीम संबंधित पुलिस थाने और अन्य इकाइयों के साथ समन्वय कर कार्रवाई में मदद कर सकती है। हालांकि, पिंक फोर्स की जिम्मेदारियां और कार्यप्रणाली अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकती हैं।
Pink Force की शुरुआत सबसे पहले कब और कहां हुई?
भारत में पिंक फोर्स की शुरुआत गोवा में हुई थी। जानकारी के अनुसार, 17 दिसंबर 2021 को गोवा के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस विशेष महिला पुलिस इकाई की शुरुआत की थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकना, जरूरत के समय सहायता उपलब्ध कराना और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया को मजबूत करना था।
शुरुआत में गोवा पुलिस की इस इकाई में करीब 250 कर्मियों को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसे 24 घंटे सक्रिय रहने की व्यवस्था के साथ शुरू किया गया था। शुरुआती चरण में इसे राज्य के 11 पुलिस थानों के अंतर्गत तैनात किया गया था।
गोवा के बाद दूसरे राज्यों में भी बढ़ा महिला सुरक्षा पर जोर
महिलाओं की सुरक्षा मजबूत करने के लिए देश के विभिन्न राज्यों में विशेष महिला पुलिस इकाइयों, महिला हेल्प डेस्क और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया है। इनका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर पुलिस तक उनकी पहुंच आसान बनाना है।
हालांकि, हर राज्य में ऐसी इकाइयों का नाम, गठन, अधिकार क्षेत्र और काम करने का तरीका एक जैसा नहीं होता। इसलिए दिल्ली में तैनात पिंक फोर्स की भूमिका को समझने के लिए दिल्ली पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
Pink Force का मुख्य काम क्या है?
पिंक फोर्स जैसी विशेष महिला पुलिस इकाइयों की भूमिका महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में अहम हो सकती है। इनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
- महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा: उनसे जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई में सहायता करना।
- सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी: बाजार, शैक्षणिक संस्थानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा मजबूत करना।
- छेड़छाड़ और उत्पीड़न की रोकथाम: ऐसी घटनाओं को रोकने और शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई में मदद करना।
- पुलिस के साथ समन्वय: जरूरत पड़ने पर संबंधित थाने और अन्य पुलिस इकाइयों के साथ मिलकर काम करना।
- सुरक्षा का भरोसा बढ़ाना: महिलाओं को शिकायत दर्ज कराने और पुलिस सहायता प्राप्त करने में सहयोग देना।
पिंक फोर्स जैसी विशेष इकाइयां इन प्रयासों में सहयोग कर सकती हैं। CJP Protest के दौरान इसकी तैनाती ने एक बार फिर महिला पुलिस इकाइयों की भूमिका को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, किसी भी प्रदर्शन में सुरक्षा व्यवस्था की सफलता पुलिस की तैयारी, समन्वय और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की प्रभावशीलता पर निर्भर करती है।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।








