नई दिल्ली: लोकसभा में लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी क्योंकि विपक्ष छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर पहले बहस चाहता था। विपक्ष का कहना है कि जब तक छात्रों के खिलाफ हुई कथित हिंसा और बल प्रयोग पर सरकार जवाब नहीं देती, तब तक परीक्षा सुधार कानून पर चर्चा अधूरी रहेगी।
दरअसल, पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन उससे जुड़े कई सवाल अब भी राजनीतिक बहस का केंद्र बने हुए हैं। इन्हीं सवालों को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है।
राहुल गांधी ने क्या सवाल उठाए?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पत्र साझा करते हुए पूछा कि—
छात्रों के खिलाफ पैलेट गन समेत बल प्रयोग की अनुमति किसने दी?
क्या गृह मंत्री के रूप में अमित शाह ने इसकी मंजूरी दी थी? यदि नहीं, तो आदेश किसने दिया?
सादे कपड़ों में छात्रों को लाठियों से पीटते दिखाई देने वाले लोग कौन थे? क्या वे पुलिसकर्मी थे या अन्य लोग?
उनकी तैनाती की अनुमति किसने दी?
Rahul Gandhi ने पत्र में कहा कि किसी भी लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ हुई कथित हिंसा ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया है और युवा जवाबदेही चाहते हैं।
इससे पहले भी राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक घायल छात्र का वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया था कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अपने अधिकारों की मांग करने वाले छात्रों को न्याय के बजाय बल प्रयोग का सामना करना पड़ा।
इसी मुद्दे पर बहस चाह रहा है विपक्ष
संसद में विपक्ष की मांग है कि सरकार पहले छात्रों पर हुई कथित कार्रवाई और उससे जुड़े सवालों का जवाब दे, उसके बाद परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा कराई जाए। विपक्ष का कहना है कि जवाबदेही तय किए बिना केवल कानून को सख्त बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
वहीं सरकार की ओर से लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक को प्राथमिकता देते हुए उसे सदन में पेश किया गया। हालांकि विपक्ष के हंगामे के कारण निर्धारित समय पर इस पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी और लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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