World Poha Day 2026: भारत में सुबह के नाश्ते (Healthy Breakfast) की बात हो और गरमागर्म पोहे का जिक्र न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। स्वाद में लाजवाब और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होने के कारण पोहा आज हर उम्र के लोगों का पसंदीदा स्नैक बन चुका है। यही वजह है कि इसके सम्मान में हर साल 7 जून को विश्व पोहा दिवस (World Poha Day) मनाया जाता है।
यह दिन मुख्य रूप से पोहे की लोकप्रियता, इसके पोषण और इससे जुड़ी सांस्कृतिक पहचान को सेलिब्रेट करने के लिए समर्पित है। आइए जानते हैं कि इस खास दिन को मनाने की शुरुआत कैसे हुई और भारत के अलग-अलग राज्यों में इसे किन नामों से पुकारा जाता है।
Read More: क्या Phone पर देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना सही है? जानें मूलांक के अनुसार सही Wallpaper
विश्व पोहा दिवस की शुरुआत कैसे हुई? (History of World Poha Day)
पोहा दिवस को मनाने और इसे वैश्विक पहचान दिलाने के पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी है:
-
शुरुआत (The Origin): इस दिवस को मनाने की शुरुआत मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से हुई थी।
-
किसने की शुरुआत?: इंदौर के मशहूर कलाकार राजीव नेमा द्वारा इस खास दिन को मनाने की शुरुआत की गई थी।
झारखंड मुख्य समाचार एवं विशेष रिपोर्टSpecial Report -
इंदौर में जश्न: इंदौर में ‘विश्व पोहा दिवस’ के मौके पर उत्सव जैसा माहौल रहता है और इस दिन कई जगहों पर आम लोगों के बीच पोहे का मुफ्त वितरण भी किया जाता है。
वैसे तो उज्जैन और छत्तीसगढ़ में पोहे का उत्पादन मुख्य रूप से होता है, लेकिन इसकी सबसे अधिक खपत इंदौर शहर में ही होती है। मालवा क्षेत्र के तो हर दूसरे घर में सुबह की शुरुआत पोहे के नाश्ते से ही होती है। सुबह-सुबह एक प्लेट गर्मागर्म पोहा और साथ में चाय का कॉम्बिनेशन किसी का भी दिन बनाने के लिए काफी है!
पोहा और जलेबी: भारतीय संस्कृति का अनोखा गठबंधन
दुनिया के बेहतरीन फूड कॉम्बिनेशन्स में पोहा और जलेबी (Poha Jalebi) का रिश्ता सबसे ऊपर आता है। पहली नजर में यह मेल असंभव लगता है—एक नमकीन और हल्का, तो दूसरी चाशनी से लबरेज मीठी जलेबी। लेकिन जब ये दोनों साथ आते हैं, तो स्वाद का जादू बिखेर देते हैं। यह कॉम्बिनेशन हमें सिखाता है कि जीवन में भी नमकीन और मीठे का संतुलन ही असली आनंद देता है।
‘एक व्यंजन, अनेक नाम’: अलग-अलग राज्यों में पोहे के रूप
पोहा भारत का सबसे लोकप्रिय और सुलभ भोजन है। चपटे किए गए चावल (Flattened Rice या Beaten Rice) से बनने वाले इस हल्के नाश्ते को देश के भिन्न-भिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है:
| राज्य/क्षेत्र | पोहा का स्थानीय नाम |
| मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र | पोहे (Poha) |
| पश्चिम बंगाल और असम | चीड़ा (Chira) |
| गुजरात | पौआ (Paua) |
| आंध्र प्रदेश और तेलंगाना | अटुकुलू (Atukulu) |
| सामान्य अंग्रेजी नाम | पीटा चावल / चपटा चावल (Beaten / Flattened Rice) |
भले ही हर राज्य में इसका नाम बदल जाता है, लेकिन इसे बनाने की सरल विधि और इसके प्रति लोगों का प्यार हमेशा एक जैसा ही रहता है।
पोहा खाने के फायदे: स्वाद भी, सेहत भी (Health Benefits of Poha)
पोहा सिर्फ बच्चों को ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों यानी हर उम्र के लोगों को बेहद पसंद आता है। इसके लोकप्रिय होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
-
पचाने में आसान: यह पेट के लिए बहुत हल्का होता है और इसे खाने के बाद भारीपन महसूस नहीं होता。
-
पौष्टिक और सुरक्षित: पोहे को बनाने की विधि जितनी सरल है, यह सेहत के लिए उतना ही पौष्टिक साबित होता है।
-
जायकेदार तड़का: पोहे को जिस तरह से तेल, राई, कढ़ी पत्ता और मिर्च के साथ छौंक (तड़का) लगाया जाता है, वह इसके स्वाद और सुगंध को कई गुना बढ़ा देता है।
तो इस World Poha Day 2026 के मौके पर आप भी अपने दिन की शुरुआत एक प्लेट स्वादिष्ट और हेल्दी पोहे के साथ करें। हैप्पी पोहा दिवस!
ये भी देखें: CCTV में आखिरी बार दिखी, फिर बंद हो गए सभी कैमरे… आखिर कहां है मासूम Aditi Pandey?
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।









