Ranchi: झारखंड में 1000 सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र दिए जाने के बाद राज्य की राजनीति गर्म हो गई है। बीजेपी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सरकार की इस पहल पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे उपलब्धि के रूप में पेश करना सही नहीं है। उनका दावा है कि राज्य में करीब 50 हजार शिक्षक पद खाली हैं और 1000 नियुक्तियां कुल रिक्तियों का केवल 2 प्रतिशत हैं।
प्रतुल शाह देव ने कहा कि राज्य के हजारों सरकारी स्कूल आज भी प्रभारी प्रधानाचार्यों के भरोसे चल रहे हैं। उनके अनुसार नियमित प्रधानाचार्यों की नियुक्ति लंबे समय से लंबित है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षकों की कमी के बावजूद उन्हें कई बार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है, जिससे पढ़ाई पर असर पड़ता है।
झारखंड में एक शिक्षक पर अधिक छात्रों की जिम्मेदारी
भाजपा नेता ने शिक्षक-छात्र अनुपात का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि राष्ट्रीय औसत की तुलना में झारखंड में एक शिक्षक पर अधिक छात्रों की जिम्मेदारी है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि राज्य के बच्चों को बेहतर शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक और नियमित प्रधानाचार्य की जरूरत है। भाजपा ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग दोहराई है।
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इधर, इस विषय पर राज्य सरकार की ओर से पहले ही 1000 सहायक आचार्यों की नियुक्ति को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। शिक्षक भर्ती को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब सभी की नजर आगे होने वाली नियुक्तियों और शिक्षा सुधार से जुड़े फैसलों पर है।
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