Ranchi: भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड के कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि राज्य के वित्त मंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले कुछ वर्षों के लगभग 10,000 करोड़ रुपये के सरकारी धन का हिसाब नहीं मिल रहा है। ऐसे में सरकार बड़े अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
एसआईटी के गठन में भी उन अफसरों को रखा गया था जिनके एसपी के कार्यकाल में खुद ट्रेजरी घोटाला हुआ था। जांच कर रही एसआईटी के दो सदस्य हजारीबाग और बोकारो में एसपी भी रह चुके हैं जहां घोटाले की चार्जशीट जमा हो चुकी है। उनसे निष्पक्ष जांच की अपेक्षा नहीं हो सकती।
सरकार ने सिर्फ छोटी मछलियों को पकड़ कर बड़े अफसर को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने का काम किया है। सीबीआई कोर्ट ने चारा घोटाले के मुकदमों में ट्रेजरी अफसरों की भी भूमिका स्वीकार करते हुए हुए सजा दिया था जिसे बाद में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक ने सही ठहराया था।
वित्त नियमावली और झारखंड कोषागार संहिता में अफसरों की जिम्मेवारी तय है
प्रतुल ने कहा कि झारखंड वित्त नियमावली के सेक्शन 114, 115 , 116, 305, 305 A और 306 और झारखंड कोषागार संहिता ,2016 के अपेंडिक्स 3, अपेंडिक्स 18 और अपेंडिक्स 19 में सरकारी धन की निकासी को लेकर डीडीओ और ट्रेज़री अफसरों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय है। संबंधित डीडीओ और ट्रेज़री अफसरों का दायित्व है कि वे बिल, दस्तावेज और हस्ताक्षरों की वैधता की जांच करें। किसी भी प्रकार का संदेह होने पर जांच करना आवश्यक है।सरकारी धन के भुगतान में अधिकारियों से पूरी सावधानी बरतने की अपेक्षा की गई है। Read More- पिता बना जल्लाद! इकलौते बेटे की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या, जांच में जुटी पुलिस प्रतुल ने कहा कि जब सीआईडी ने चार्जशीट की तो उसमें सभी डीडीओ और ट्रेज़री अफसरों को क्लीनचिट देते हुए उनका नाम भी शामिल नहीं किया। चाईबासा कोषागार के ट्रेज़री घोटाले में भी सीआईडी ने सिर्फ सिपाहियों का नाम दिया है। झारखंड में घोटाले की लीपा पोती होने के लिए जिस जांच को ठंडा बस्ते में डालना होता है उसे सीआईडी को जिम्मा दे दिया जाता है। Read More- कोडरमा-गया रेलखंड पर बड़ा हादसा-रेलवे गैंगमैन की दर्दनाक मौतसरकार ने ट्रेजरी घोटाले से संबंधित दस्तावेज पीएजी को ढाई महीने बाद भी नहीं सौंपा
प्रतुल ने कहा कि राज्य सरकार ने स्पेशल ऑडिट की अनुशंसा प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल को की थी।इसके आलोक में प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल ने 11 मई, 2026 को गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर 87 प्रकार के दस्तावेज मांगे थे। राज्य सरकार ने 2 महीने से भी ज्यादा बीत जाने के बाद ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं। Read More- कोडरमा सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, शव उठाने को नहीं मिले कर्मचारी इसी तरीके से उत्पाद सचिव के नेतृत्व में बनी हुई एसआईटी ने भी अभी तक कोई जांच रिपोर्ट नहीं दी है। पूरे मामले को राज्य सरकार रफा दफा करने में लगी हुई है। राज्य सरकार भूल जाती है किसी तरीके से चारा घोटाले को रफा दफा करने के आरोप में लालू प्रसाद को 6 मुकदमों में सजा हो गई थी। वर्तमान सरकार भी वही गलती दोहरा रही है। प्रेस वार्ता में प्रदेश के सह मीडिया प्रभारी अजय राय भी उपस्थित थे।
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