दुर्गापुर: West Bengal के पश्चिम बर्दवान जिले के अंडाल क्षेत्र में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब खदान के समीप स्थित रिहायशी इलाके में अचानक जमीन हिलने लगी और कई मकानों में बड़ी दरारें दिखाई देने लगीं। घटना के बाद भयभीत लोग अपने घर छोड़कर खुले मैदानों में शरण लेने को मजबूर हो गए। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि प्रभावित परिवार सुरक्षित पुनर्वास और राहत की मांग कर रहे हैं।
नीलकंठ ताला के धोबापारा इलाके में मचा हड़कंप
जानकारी के अनुसार, अंडाल की खांद्र पंचायत के नीलकंठ ताला से सटे धोबापारा इलाके में यह घटना हुई। यह इलाका ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के बंकोला क्षेत्र स्थित विश्वेश्वर कोलियरी से करीब 200 मीटर की दूरी पर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दोपहर के समय अचानक तेज झटके महसूस हुए। इसके कुछ ही देर बाद कई घरों की दीवारों और फर्श में दरारें पड़ गईं। जमीन के बार-बार हिलने से लोग घबरा गए और परिवारों ने तुरंत घर खाली कर दिए।
सैकड़ों परिवारों ने खुले मैदान में ली शरण
घटना के बाद कई परिवार अपने जरूरी सामान तक नहीं निकाल सके और बच्चों व बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर निकल गए। फिलहाल प्रभावित लोग पास के एक खुले मैदान में अस्थायी रूप से रह रहे हैं।
मानसून के बीच खुले आसमान के नीचे रहने की मजबूरी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षित आवास, राहत सामग्री और पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है।
पुलिस मौके पर पहुंची, लोगों को सतर्क रहने की सलाह
सूचना मिलने के बाद अंडाल थाना क्षेत्र की उखरा फाड़ी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने इलाके का जायजा लिया और लोगों से एहतियात बरतने तथा खतरे वाले स्थानों से दूर रहने की अपील की।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से किसी बड़े नुकसान, प्रभावित परिवारों की संख्या या स्थायी पुनर्वास को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी।
स्थानीय लोगों ने पुराने हादसे की दिलाई याद
इलाके के लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में जमीन धंसने का खतरा लंबे समय से बना हुआ है। उनका आरोप है कि वर्षों पहले अंडाल के जामबाद खदान क्षेत्र में भी इसी तरह की घटना हुई थी, जिसमें कई घर जमीन में समा गए थे और एक महिला की मौत हो गई थी।
स्थानीय निवासियों का दावा है कि उस हादसे के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई आश्वासन दिए गए थे, लेकिन जमीन पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
क्या कोयला खनन है वजह?
स्थानीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि विश्वेश्वर कोलियरी के आसपास लंबे समय से हुए भूमिगत कोयला खनन के कारण जमीन के नीचे खाली परत (वॉइड) बनने से यह स्थिति उत्पन्न हुई हो सकती है।
हालांकि, इस संभावित कारण की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या संबंधित कोलियरी प्रबंधन ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
विशेषज्ञ जांच की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विशेषज्ञों से भू-वैज्ञानिक जांच कराने, प्रभावित इलाके का विस्तृत सर्वे कराने और भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोकने के लिए स्थायी समाधान की मांग की है।
फिलहाल प्रशासन और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि इलाके के लोग किसी भी संभावित लैंडस्लाइड की आशंका के बीच भय के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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