Ranchi: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएजी रिपोर्ट के हवाले से हेमंत सरकार पर प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में गरीबों के आवास, ग्रामीण रोजगार और हर घर तक नल से पानी पहुंचाने जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठे हैं।
मरांडी ने जल जीवन मिशन में निविदा प्रक्रिया का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुछ निविदाओं में प्रतिस्पर्धा कम रही और कुछ मामलों में अनुमानित लागत से अधिक दर पर काम दिए गए। उन्होंने एक संवेदक को अलग-अलग निविदाओं के जरिए करीब ₹148 करोड़ के काम दिए जाने पर सीएजी की आपत्ति का भी जिक्र किया।
पात्र परिवारों में से 6.32 लाख योजना से बाहर रह गए
उन्होंने रांची-पूर्वी और खूंटी प्रमंडल की निविदाओं में केवल दो बोलीदाताओं और उनके डिमांड ड्राफ्ट एक-दूसरे द्वारा खरीदे जाने की बात का भी उल्लेख किया। इन दावों की अंतिम स्थिति सीएजी रिपोर्ट और संबंधित विभागीय कार्रवाई के संदर्भ में देखी जानी होगी। पीएम आवास योजना-ग्रामीण को लेकर मरांडी ने कहा कि लक्ष्य और लाभार्थियों को अंतिम रूप देने में देरी के कारण 22.34 लाख पात्र परिवारों में से 6.32 लाख योजना से बाहर रह गए। मनरेगा में निधि जारी करने में 40 से 55 दिन की देरी और कुछ कथित तौर पर अस्वीकार्य खर्च का भी उन्होंने जिक्र किया। वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2025 तक ₹1,60,565 करोड़ के खर्च से जुड़े उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित थे। वहीं 2024-25 के ₹1,50,938.84 करोड़ के बजट में ₹31,110 करोड़ खर्च नहीं हो सका।छात्रों के आंदोलन पर भी सरकार को घेरा
मरांडी ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान देर रात रांची डीसी और एसएसपी के धरनास्थल पहुंचने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने सरकार की चार सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति से छात्रों से बातचीत करने या समिति को भंग करने की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह, प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार, मृत्युंजय शर्मा और केके गुप्ता मौजूद रहे।
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