Ranchi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता उज्जवल प्रकाश तिवारी ने प्रधानमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
कोई भी ठप्पा असहमति की आवाजों को दबाने में सफल नहीं होगा
तिवारी ने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ या इस तरह का कोई भी ठप्पा असहमति की आवाजों को दबाने में सफल नहीं होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार से सवाल पूछने वाले पढ़े-लिखे युवाओं को सिर्फ इसी आधार पर ‘नक्सली’ कैसे कहा जा सकता है। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का यह बयान सरकार के अहंकार और युवाओं की समस्याओं को हल करने में उसकी नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर युवा लगातार सवाल उठा रहे हैं।प्रधानमंत्री का बयान असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश
तिवारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री का बयान असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान युवाओं के रोजगार और शिक्षा से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए दिए जा रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण में इस्तेमाल किए गए इस शब्द को लेकर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री या भाजपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है।
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