Ranchi: केंद्र सरकार के खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। झामुमो और राज्य सरकार जहां विधेयक के खिलाफ आंदोलन की बात कर रहे हैं, वहीं भाजपा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि खान-खनिज बिल को मुद्दा बनाकर राज्य सरकार असल में झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब लोकसभा और राज्यसभा में इस संशोधन विधेयक पर चर्चा हो रही थी, तब झामुमो और कांग्रेस के सांसदों को सदन में अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि उस समय विपक्षी सांसदों ने चर्चा में प्रभावी भूमिका निभाने के बजाय हंगामा किया और अब बिल पारित होने के बाद राज्य में विरोध की राजनीति की जा रही है।
विधेयक का उद्देश्य खनिजों की व्यवस्था को एक समान बनाना है
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि खान एवं खनिज संशोधन विधेयक पूरे देश में लागू होने वाला कानून है। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य खनिजों की व्यवस्था को एक समान बनाना है। उन्होंने दावा किया कि झारखंड में लंबे समय से खनिजों पर अतिरिक्त उपकर लगाए जाने के कारण यहां से कारोबार प्रभावित हो रहा है और दूसरे राज्यों की तुलना में झारखंड के खनिज महंगे पड़ रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर सेस बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2025 से अब तक आयरन ओर पर सेस में कई बार बढ़ोतरी की गई। उनके अनुसार, मार्च 2025 में जहां प्रति टन 100 रुपये सेस था, उसे बढ़ाकर पहले 500 रुपये और फिर 600 रुपये किया गया। इसी तरह कोयले पर भी सेस बढ़ाए जाने की बात उन्होंने कही। भाजपा नेता ने दावा किया कि बढ़े हुए सेस का असर उद्योगों पर पड़ रहा है और टाटा तथा सेल जैसी कंपनियों ने झारखंड से आयरन ओर लेना कम या बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा में समान खनिज कम लागत पर उपलब्ध होने के कारण झारखंड के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती बढ़ गई है। Read More- Big Breaking : JSSC कार्यालय में CID की छापेमारी, सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ जारीखनिज संशोधन विधेयक के नाम पर जानबूझकर नया राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा
बाबूलाल मरांडी ने खनिज राजस्व को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले राज्य को खनिज से करीब 25 हजार करोड़ रुपये की रॉयल्टी मिलती थी, जबकि अब यह राशि बढ़कर करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार को इसका श्रेय देते हुए कहा कि राज्यों के हिस्से में बढ़ोतरी की गई है। Read More- राहुल गांधी ने सीएम हेमंत को लिखा पत्र-छात्रों से सीधे मिलने की अपील उन्होंने आरोप लगाया कि खान एवं खनिज संशोधन विधेयक के नाम पर झारखंड में जानबूझकर नया राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है। बाबूलाल ने कहा कि राज्य में छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और सरकार का ध्यान उन मुद्दों से हटाने के लिए खनिज बिल को लेकर हंगामा खड़ा किया जा रहा है। Read More- पिठौरिया घाटी में भयंकर सड़क दुर्घटना, ट्रक ने बाइक और कार में मारी टक्कर-2 की मौत कई घायल बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार की इस रणनीति को छात्र और झारखंड की जनता दोनों समझ रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से छात्रों की मांगों पर सीधे बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की।
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