Breaking News: बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। मशहूर उर्दू शायर डॉ. बशीर बद्र का गुरुवार दोपहर भोपाल में निधन हो गया। 91 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से जूझ रहे बद्र पिछले कुछ समय से काफी कमजोर हो गए थे और याददाश्त भी प्रभावित हो गई थी। परिजन के अनुसार उनका अंतिम संस्कार आज शाम किया जा सकता है।
1974 से 1990 का समय स्वर्णिम काल रहा
बताते चलें कि बशीर बद्र की सबसे बड़ी खासियत उनकी शायरी की सादगी थी। उन्होंने कठिन उर्दू शब्दों के बजाय आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया। साल 1974 से 1990 तक का समय उनके करियर का ‘स्वर्ण युग’ था। उनकी मशहूर पंक्तियाँ जैसे-“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए” आज भी हर शख्स की जुबां पर रहती हैं।
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परिजनों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार आज शाम भोपाल में किया जा सकता है। डॉ. बद्र अपने पीछे गजलों का वो अनमोल खजाना छोड़ गए हैं, जो आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।









