जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी मुख्य बातें:
- 5 घंटे चला प्रदर्शन: दोपहर 3 बजे अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक के रवाना होने के बाद जंतर-मंतर की जगह खाली हुई।
- दिग्गजों का मिला साथ: मशहूर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक हाथ में गुलाब का फूल लेकर छात्रों के समर्थन में पहुंचे। उनके साथ CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका (IIT कानपुर पास आउट, जो लंदन से लौटे हैं) भी मौजूद थे।
- शिक्षा मंत्री को अल्टीमेटम: CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की है और इसके लिए 5 दिन का समय (अल्टीमेटम) दिया है। बात न माने जाने पर 13 जून को दोबारा प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।
- एहतियातन हिरासत: प्रदर्शन के दौरान समर्थकों और विरोधियों के बीच टकराव की आशंका को देखते हुए पुलिस ने 6 लोगों को हिरासत में लिया। एक व्यक्ति जो कॉकरोच मारने वाला ‘हिट’ (HIT) लेकर पहुंचा था, उसे CJP समर्थकों ने तुरंत बाहर निकाल दिया।
- रोहित पवार का समर्थन: NCP (SP) के महासचिव रोहित पवार ने CJP को अपना समर्थन देते हुए कहा कि यह आंदोलन दिखाता है कि देश के युवाओं में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
सोशल मीडिया पर CJP का दबदबा: इंस्टाग्राम पर भाजपा से 1.25 करोड़ ज्यादा फॉलोअर्स
कॉकरोच जनता पार्टी भविष्य में एक औपचारिक पॉलिटिकल पार्टी बनेगी या नहीं, यह अभी पूरी तरह तय नहीं है; लेकिन सोशल मीडिया पर इस संगठन को जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है।
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प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के सोशल मीडिया आंकड़े (6 जून, दोपहर 1 बजे तक):
| पार्टी का नाम | इंस्टाग्राम फॉलोअर्स | एक्स (ट्विटर) फॉलोअर्स |
| कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) | 2.22 करोड़ | 2.62 लाख |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 94 लाख | 2.30 करोड़ |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) | 1.37 करोड़ | 1.15 करोड़ |
| आम आदमी पार्टी (AAP) | 19 लाख | 61 लाख |
CJP फाउंडर अभिजीत दीपके के 4 बड़े बयान
पुणे में जन्मे CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके के घर पर महाराष्ट्र पुलिस की भारी तैनाती कर दी गई है और बैरिकेडिंग की गई है। मौजूदा व्यवस्था और छात्रों के अधिकारों को लेकर अभिजीत के ये 4 बयान इस समय देश भर में वायरल हो रहे हैं:
- “जब मेरी फ्लाइट दिल्ली में लैंड होने वाली थी, तो ऐसा लगा जैसे आजादी के आखिरी पल जी रहा हूं।”
- “जेल जाने के डर से कई लोगों ने समझौता कर लिया है और बिक गए हैं। लेकिन इस देश का छात्र, युवा नहीं बिका है।”
- “मेरे भारत लौटने पर मां रो रही थी। उन्हें डर था अरेस्ट हो जाऊंगा। ये डर हर उस मां को है जिनका बेटा सिस्टम पर सवाल उठाता है।”
- “सरकार ने सालों तक हमें हिंदू-मुसलमान की राजनीति में फंसा कर रखा। हिंदू-मुसलमान करने से देश में किसी को नौकरियां नहीं मिलतीं।”
इतिहास के झरोखे से: जन आंदोलन से जन्मीं देश की 6 बड़ी राजनीतिक पार्टियां
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े जन-आक्रोश या आंदोलन से राजनीतिक दल का उदय हुआ हो। देश में पहले भी 6 ऐसी बड़ी पार्टियां रही हैं जो व्यवस्था के खिलाफ लड़कर सत्ता में आईं:
1. आम आदमी पार्टी – AAP (2012)
- आंदोलन की पृष्ठभूमि: साल 2011-12 में देश में चले ऐतिहासिक ‘जन लोकपाल आंदोलन’ (अन्ना आंदोलन) से शुरुआत हुई, जो 2 साल चला।
- प्रमुख चेहरा: अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल।
- इतिहास: 2012 में गठन हुआ और 2013 में कांग्रेस के बाहरी समर्थन से अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री (CM) बने।
- रणनीति: फेसबुक, ट्विटर (अब एक्स), वॉलंटीयर नेटवर्क, धरने और सभाओं के जरिए लोगों को जोड़ा।
2. तेलंगाना राष्ट्र समिति – TRS / अब BRS (2001)
- आंदोलन की पृष्ठभूमि: आंध्र प्रदेश से अलग ‘तेलंगाना राज्य’ की मांग को लेकर 13 साल लंबा आंदोलन चला।
- प्रमुख चेहरा: के. चंद्रशेखर राव (KCR)।
- इतिहास: 2001 में TRS बनी, 2014 में तेलंगाना का गठन हुआ और KCR मुख्यमंत्री बने। 2022 में नाम बदलकर BRS हुआ।
- रणनीति: छात्र, कर्मचारी, किसान और युवाओं को साथ लेकर रैलियां, पदयात्राएं और धरने किए।
3. असम गण परिषद – AGP (1985)
- आंदोलन की पृष्ठभूमि: असम में ‘अवैध प्रवासियों’ के गंभीर मुद्दे को लेकर छात्रों का 6 साल लंबा आंदोलन।
- प्रमुख चेहरा: प्रफुल्ल कुमार महंत, बिराज सरमा और भृगु फुकन।
- इतिहास: 14 अक्टूबर 1985 को AGP का गठन हुआ। केंद्र के साथ ‘असम समझौता’ हुआ और प्रफुल्ल महंत महज 32 वर्ष की उम्र में CM बने।
- रणनीति: छात्र संगठन, जनसभाएं, गांव-गांव जनसंपर्क, बंद और हड़तालें।
4. बहुजन समाज पार्टी – BSP (1984)
- आंदोलन की पृष्ठभूमि: दलितों, पिछड़ों और शोषितों के अधिकारों के लिए 2 दशक (20 साल) लंबा आंदोलन चला।
- प्रमुख चेहरा: मान्यवर कांशीराम और मायावती।
- इतिहास: 1984 में BSP बनाई गई। 1995 में मायावती पहली बार यूपी की CM बनीं (कुल 4 बार मुख्यमंत्री रहीं)।
- रणनीति: SC-ST, OBC कर्मचारियों का नेटवर्क (BAMCEF), सदस्यता अभियान और गांव स्तर पर सघन प्रचार।
5. जनता पार्टी (1977)
- आंदोलन की पृष्ठभूमि: 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाई गई ‘इमरजेंसी (आपातकाल)’ के विरोध में 2 साल चला आंदोलन।
- प्रमुख चेहरा: लोकनायक जयप्रकाश नारायण (JP)।
- इतिहास: जनवरी 1977 में जनता पार्टी बनी। मार्च 1977 में देश में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने।
- रणनीति: छात्र आंदोलन, ‘लोकतंत्र बचाने’ का राष्ट्रव्यापी अभियान और सघन जनसंपर्क।
6. झारखंड मुक्ति मोर्चा – JMM (1973)
- आंदोलन की पृष्ठभूमि: बिहार से अलग ‘झारखंड राज्य’ की मांग और आदिवासियों के हक के लिए 27 साल लंबा संघर्ष।
- प्रमुख चेहरा: बिनोद बिहारी महतो, ए.के. राय और शिबू सोरेन।
- इतिहास: 1973 में JMM का गठन हुआ। 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बना और 2005 में शिबू सोरेन पहली बार राज्य के CM बने।
- रणनीति: आदिवासी मेले, पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम, जनसभाएं और पदयात्राएं।
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