Hazaribagh: हजारीबाग एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में सामने आए करीब 28 करोड़ रुपये के कथित गबन मामले की जांच में सरकारी रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा में हेरफेर की बात सामने आई है। रांची स्थित विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान सीआईडी और अभियोजन पक्ष ने जांच से जुड़े कई तथ्य रखे।
हार्डकॉपी बिल और सिस्टम में दर्ज सॉफ्ट कॉपी के विवरण में अंतर
सीआईडी के अनुसार, हजारीबाग एसपी कार्यालय के डीडीओ कोड HZBPOL007 का इस्तेमाल कर कथित तौर पर आठ से दस वर्षों तक अवैध लेन-देन किए गए। जांच में हार्डकॉपी बिल और सिस्टम में दर्ज सॉफ्ट कॉपी के विवरण में अंतर मिलने की बात कही गई है।
एसबीआई के दो खातों में सरकारी राशि ट्रांसफर किए जाने का आरोप
एजेंसी के मुताबिक, कुल निकासी राशि दोनों रिकॉर्ड में समान रखी जाती थी, ताकि लेन-देन पहली नजर में संदिग्ध न लगे। जांच में सिपाही शंभू कुमार, रजनीश सिंह उर्फ पंकज सिंह और धीरेंद्र सिंह की भूमिका सामने आने का दावा किया गया है।
सीआईडी ने अदालत को बताया कि शुरुआती जांच में गया स्थित एसबीआई की अनुग्रह कॉलोनी शाखा के दो खातों में सरकारी राशि ट्रांसफर किए जाने का पता चला। इनमें एक खाता शंभू कुमार के नाम और दूसरा संगीता चौधरी के नाम बताया गया है।
कुल 21 बैंक खातों में भेजे गए ट्रेजरी की राशि
वित्त विभाग के पीएफएमएस ट्रेजरी डेटा के विश्लेषण में पहले करीब 15.41 करोड़ रुपये के गबन का संकेत मिला था। आगे की जांच में कुल 21 बैंक खातों के इस्तेमाल की बात सामने आने और करीब 27 से 28 करोड़ रुपये की सरकारी राशि के कथित गबन का दावा किया गया।
सीआईडी के मुताबिक, आरोपी एसपी कार्यालय की लेखा शाखा से जुड़े लोक सेवक थे और उन पर पद का दुरुपयोग कर आपराधिक साजिश के तहत सरकारी राशि निकालने का आरोप है। मामले में अदालत में जांच से जुड़े तथ्य रखे जा रहे हैं और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

4 years of experience in journalism. Previously, I worked with organizations such as Swadesh Today, News 11 Bharat, and News 22 Scope. For the past year, I have been working as a content writer at Khabar Mantra.












