धनबाद, 21 सितंबर: डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो समेत चार आरोपियों को धनबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। हालांकि, कोर्ट ने जमानत के साथ कई शर्तें भी लगाई हैं। चारों आरोपियों को चार्ज फ्रेम होने तक अदालत की हर तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। किसी एक तारीख पर भी गैरहाजिरी होने पर निचली अदालत को जमानत बंधपत्र रद्द करने का अधिकार होगा।
एमपी-एमएलए कोर्ट के जज सह अपर सत्र न्यायाधीश-16 डीसी अवस्थी की अदालत ने जयराम महतो के अलावा सुशील मंडल उर्फ सुशील कुमार, महेंद्र साव उर्फ महेंद्र प्रसाद साव और राज कुमार मंडल को अग्रिम जमानत दी है।
20-20 हजार रुपये का बॉन्ड, दो-दो जमानतदार जरूरी
कोर्ट ने आदेश दिया है कि गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की स्थिति में प्रत्येक आरोपी को 20 हजार रुपये का जमानत बांड देना होगा। इसके साथ समान राशि के दो जमानतदार भी देने होंगे।
अदालत के आदेश के मुताबिक, जमानतदारों में एक आरोपी का वर्तमान पैरवीकार और दूसरा उसका करीबी रिश्तेदार होना जरूरी है।
सूचक और उसके परिवार को धमकी देने पर रोक
अग्रिम जमानत देते हुए कोर्ट ने आरोपियों पर यह भी शर्त लगाई है कि वे सूचक या उसके परिवार के सदस्यों को किसी भी तरह की धमकी, परेशानी या असुविधा नहीं पहुंचाएंगे।
इसके अलावा सभी आरोपियों को अपना आधार कार्ड और मोबाइल नंबर अदालत में जमा करना होगा। मुकदमा लंबित रहने के दौरान अदालत की अनुमति के बिना मोबाइल नंबर बदलने की भी अनुमति नहीं होगी।
कोर्ट ने क्यों दी अग्रिम जमानत?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चारों आरोपियों की पहचान स्पष्ट है और उनके फरार होने या जांच से बचने को लेकर कोई आरोप सामने नहीं है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा कोई विशिष्ट तथ्य सामने नहीं आया, जिससे हथियार या किसी आपत्तिजनक वस्तु की बरामदगी अथवा किसी अन्य उद्देश्य से आरोपियों की हिरासत में पूछताछ जरूरी साबित हो।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपियों को अग्रिम जमानत का लाभ दिया।
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, 22 अगस्त 2026 को बरवाअड्डा पुलिस एक मामले में गणेश दास को बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत नोटिस देने गई थी। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार और सरकारी काम में बाधा डालने के बाद गणेश दास को गिरफ्तार कर थाने की हाजत में रखा गया।
इसके बाद पुलिस के अनुसार, जयराम महतो ने एक पुलिस पदाधिकारी को WhatsApp ऑडियो कॉल किया। आरोप है कि रात में वह अपने समर्थकों के साथ बरवाअड्डा थाना पहुंचे, जहां पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की हुई तथा गिरफ्तार व्यक्ति को छुड़ाने का प्रयास किया गया।
इसी घटना को लेकर बरवाअड्डा थाना में मामला दर्ज किया गया था।
कोर्ट ने निर्वाचित प्रतिनिधि की भूमिका पर क्या कहा?
अदालत ने अपने आदेश में एक अहम टिप्पणी भी की। कोर्ट ने कहा कि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि का थाना जाकर अपने क्षेत्र के किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी या हिरासत के संबंध में जानकारी लेना मात्र अपराध नहीं है।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्वाचित प्रतिनिधि कानून से ऊपर नहीं हैं। यदि धमकी, हमला या पुलिस के वैध कार्य में जबरन बाधा डालना साबित होता है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
अब मामले में आगे की सुनवाई के दौरान चारों आरोपियों की व्यक्तिगत उपस्थिति और जमानत की शर्तों के पालन पर भी नजर रहेगी।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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