25 साल सत्ता में रहने का जश्न नहीं, PM Modi देश को दें 25 साल का हिसाब: केशव महतो कमलेश
रांची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संवैधानिक सत्ता के केंद्र में 25 वर्ष (गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में) पूरे होने के अवसर पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 25 साल सत्ता में रहने का जश्न मनाने से पहले प्रधानमंत्री को देश की जनता के सामने अपने दावों, वादों और फैसलों का पारदर्शी हिसाब देना चाहिए।
केशव महतो कमलेश ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में केवल लंबे समय तक कुर्सी पर बने रहना सफलता का मापदंड नहीं है। असली कसौटी यह है कि इस अवधि में देश के युवा, किसान, गरीब और मध्यम वर्ग के जीवन में क्या बदलाव आया।
‘जनता प्रचार नहीं, परिणाम चाहती है’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश केवल बड़े पोस्टरों, भाषणों और विज्ञापनों से नहीं चलता; बल्कि रोजगार, किसानों की खुशहाली, मजदूरों की उचित मजदूरी, मध्यम वर्ग की बचत और आम नागरिकों की क्रय शक्ति से चलता है। उन्होंने कहा कि यदि 25 वर्षों तक सत्ता के शीर्ष पर रहने के बाद भी देश का युवा नौकरी के लिए भटक रहा है और आम परिवार महंगाई से त्रस्त है, तो सरकार से सवाल पूछे ही जाएंगे।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष द्वारा पूछे गए 10 तीखे सवाल
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रोजगार के वादे का हिसाब कहाँ है?
डिग्री हाथ में लेकर नौकरी की तलाश में दर-दर भटक रहे युवाओं के संदर्भ में प्रधानमंत्री बताएं कि रोजगार को लेकर किए गए बड़े-बड़े दावों का वास्तविक हिसाब जनता के सामने कब रखा जाएगा?
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किसान की आय दोगुनी हुई या सिर्फ वादा?
झारखंड मुख्य समाचार एवं विशेष रिपोर्टSpecial Reportकिसानों की आय दोगुनी करने का दावा किया गया था। सरकार स्पष्ट करे कि किसान की वास्तविक आय में कितनी वृद्धि हुई और इस अधूरे वादे की जवाबदेही किसकी है?
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महंगाई से जनता को राहत कब मिलेगी?
रसोई के बजट से लेकर बच्चों की शिक्षा और इलाज तक के बढ़ते खर्चों ने आम परिवार की कमर तोड़ दी है। महंगाई से राहत देने वाले दावों का असर धरातल पर क्यों नहीं दिख रहा?
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युवाओं के भविष्य का जिम्मेदार कौन?
पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में महीनों-सालों की देरी और परीक्षाओं की अनिश्चितता ने लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका दिया है। इस बदहाल व्यवस्था के लिए जिम्मेदारी तय करने में बार-बार देरी क्यों होती है?
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छोटे कारोबारियों और MSME को राहत कब?
लघु उद्योग और छोटे व्यापारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। बड़े आर्थिक फैसलों के बाद संकट झेल रहे छोटे कारोबारियों की समस्याओं को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए?
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आर्थिक विकास का लाभ आम आदमी की जेब तक कितना पहुँचा?
बड़ी अर्थव्यवस्था के आंकड़ों के बीच आम नागरिक की वास्तविक आय, बचत और क्रय शक्ति में कितना सुधार हुआ? केवल आंकड़ों का आकार बढ़ने से आम आदमी का घर नहीं चलता।
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सरकार जवाबदेही से क्यों बचती है?
खबर मन्त्र एक्सक्लूसिव पड़ताल एवं विश्लेषणExclusiveलोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है। संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या पारदर्शी कदम उठाए गए?
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संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल क्यों?
देश की संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर लगातार उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक और स्पष्ट जवाब सरकार कब देगी?
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25 साल में जनता को नतीजे मिले या सिर्फ नारे?
‘विकास’ और ‘परिवर्तन’ के नारों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के ठोस परिणामों के साथ साबित करने की पूरी जिम्मेदारी सत्तासीन सरकार की है।
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25 साल का जश्न होगा या 25 साल का हिसाब?
प्रधानमंत्री को यह तय करना होगा कि वे केवल अपनी उपलब्धियां गिनाएंगे या अधूरे वादों और नाकाम नीतियों का जवाब भी देंगे।
“लोकतंत्र में जनता के सवालों से बड़ी कोई कुर्सी नहीं”
केशव महतो कमलेश ने अपने वक्तव्य का समापन करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता ही अंतिम मालिक है और सत्ता में बैठे लोगों को जनता के प्रति जवाबदेह होना ही पड़ेगा। सत्ता की कुर्सी कितनी भी ऊंची क्यों न हो, वह लोकतंत्र में जनता के सवालों से बड़ी नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री को 25 साल का जश्न मनाने के साथ-साथ देश की जनता को इन 25 सालों का पारदर्शी हिसाब भी देना होगा।

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