Bihar News: पटना जिले के मसौढ़ी में प्रशासनिक गलियों से आज एक अजब-गजब क्रांति ने जन्म लिया. वर्षों से इंसान लाइन में खड़े होकर अपने कागज़ों में जन्म, जाति, और निवास प्रमाण पत्र की उम्मीद में बुजुर्ग हो जाता था — लेकिन अब, एक “डॉग बाबू” ने यह सिद्ध कर दिया कि अगर आपके पास थोड़ी सी चालाकी हो और एक कंप्यूटर ऑपरेटर का साथ हो — तो कुत्ता भी सरकारी नागरिक बन सकता है.
अब डॉग बाबू भी हैं बिहार के ‘स्थायी निवासी‘
पटना प्रशासन द्वारा जारी एक दस्तावेज़ में यह साफ-साफ लिखा गया है “यह प्रमाणित किया जाता है कि डॉग बाबू, पिता- कुत्ता बाबू, माता- कुतिया देवी, ग्राम – काउली चक, वार्ड संख्या 15 के स्थायी निवासी हैं.
अब सवाल ये नहीं कि डॉग बाबू कौन हैं. सवाल ये है — कुत्ता बाबू की पत्नी ‘कुतिया देवी‘ को आधार कार्ड मिला कि नहीं?
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सरकार बोले – गड़बड़ी हुई है
जिलाधिकारी त्याग राजन ने 24 घंटे के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. और तुरंत X (पूर्व Twitter) पर स्टेटमेंट जारी कर दी कि मसौढ़ी अंचल में ‘डॉग बाबू’ के नाम से सर्टिफिकेट जारी हुआ है, मामला संज्ञान में आने के बाद इसे रद्द कर दिया गया है.’
प्रश्न उठता है — क्या डॉग बाबू ने इसे RTGS से बनवाया था या PAWS से?
सूत्रों का दावा
सूत्र बताते हैं कि डॉग बाबू अपने दस्तावेज़ लेकर खुद कार्यालय नहीं गए थे, बल्कि उनका एक वफादार इंसान ले गया था.
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कंप्यूटर ऑपरेटर ने कहा
“हमसे गलती हो गई… लेकिन फोटो तो इंसान की थी!”
अब सवाल यह है— तो फिर नाम और माता-पिता के नाम में ऐसा रचनात्मक प्रयोग क्यों किया गया? क्या ऑपरेटर गोविंद झा अंदर ही अंदर मुनव्वर राणा बनने की कोशिश कर रहे थे?
आगे क्या होगा?
अब खबर है कि आवेदक, ऑपरेटर और अधिकारी— सब पर प्राथमिकी दर्ज होगी. वहीं डॉग बाबू अपने मोहल्ले में सेलिब्रिटी बन गए हैं. बच्चें उन्हें देखकर कहते हैं— “देखो! वो सरकारी कुत्ता जा रहा है!”
“डॉग बाबू जिंदाबाद!”
क्योंकि इस देश में इंसान का काम हो या न हो, कुत्ते भी बन सकते हैं ‘प्रमाणित नागरिक‘— अगर सिस्टम चाह ले.













