खबर मंत्र संवाददाता, (Dhanbad): कोयलांचल धनबाद के सोनारडीह ओपी अंतर्गत टांडाबारी (कर्मकार टोला) में एक बार फिर प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला है। बुधवार देर रात करीब 2:30 बजे जब पूरा इलाका गहरी नींद में सोया था, तभी एक भयानक और तेज आवाज के साथ जमीन फट गई। देखते ही देखते एक बड़े भूभाग की जमीन धंस गई और दूर-दूर तक लंबी दरारें (गोफ) उभर आईं।
गनीमत यह रही कि इस हादसे में किसी की जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन प्रभावित स्थल से महज कुछ ही कदमों की दूरी पर दर्जनों घर स्थित हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी दहशत और असुरक्षा का माहौल है।
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5वीं बार दहला टांडाबारी, 31 मार्च की त्रासदी की यादें हुईं ताजा
टांडाबारी क्षेत्र के लिए यह कोई पहली आपदा नहीं है। इलाके के लोग लगातार पांचवीं बार ऐसी जानलेवा स्थिति का सामना कर रहे हैं। ग्रामीण अभी उस दिल दहला देने वाले हादसे के घावों से उबरे भी नहीं थे, जब इसी साल 31 मार्च को हुई एक भीषण भू-धंसान में दो घर जमींदोज हो गए थे और मलबे में दबने से तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। उस त्रासदी के बाद से ही इलाके में लगातार जमीन धंसने और गोफ बनने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
ग्रामीणों का आरोप: “पूरा इलाका भूमिगत आग (Underground Fire) और अनियंत्रित अवैध खनन के दुष्प्रभावों के कारण बारूद के ढेर पर बैठा है, जहां कभी भी कोई बड़ी त्रासदी हो सकती है।”
Dhanbad: प्रशासन और BCCL ने अब तक क्या किया?
31 मार्च की भयानक त्रासदी और लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए हाल ही में जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से प्रभावित परिवारों का रेस्क्यू किया गया था। बेलगढ़िया टाउनशिप के लगभग 70 से अधिक परिवारों को सुरक्षित पुनर्वासित किया गया सिंदुआटांड आवास में 100 से अधिक प्रभावितों को शिफ्ट किया गया।
हालांकि, कर्मकार टोला में हुई इस ताजा घटना के बाद बचे हुए स्थानीय लोगों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
“त्वरित पुनर्वास नहीं हुआ तो होगी बड़ी मानवीय त्रासदी”
बार-बार हो रहे इन हादसों से नाराज ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बीसीसीएल (BCCL) प्रबंधन के खिलाफ गहरी नाराजगी जताई है। बेघर होने की कगार पर खड़े लोगों की मांगें स्पष्ट हैं:
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सुरक्षा के पुख्ता उपाय: प्रभावित क्षेत्र की तुरंत घेराबंदी की जाए और गैस/आग की मॉनिटरिंग हो।
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त्वरित पुनर्वास (Immediate Rehabilitation): बचे हुए प्रभावित परिवारों को भी तत्काल सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि प्रशासन ने पिछली मौतों से सबक लेकर बाकी बचे परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की, तो कभी भी कोई बड़ी मानवीय त्रासदी दोबारा घट सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन की होगी।
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