Jharkhand: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी और सेटिंग-गेटिंग को लेकर CID की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा घोटाले की जांच CID के द्वारा की जा रही है। इस जांच में हर दिन नए और चौकाने वाले खुलासे सामने आ रहे है। पहले CID ने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते को गिरफ्तार किया है। लेकिन अब यह जानकारी मिल रही है कि इस मामले में CID अन्य लोगों के घरों पर छापेमारी कर सकती है। ऐसा इस लिए क्योंकि अभय तिवारी जो टीडीपीएल का मार्केटिंग मैनज था उससे CID पूछताछ कर रही है। इस पूछताछ में एक हमत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है।
अभय तिवारी से पूछताछ में तीन JPSC सदस्यों के नाम
CID को दिये अपने बयान में अभय तिवारी ने जेपीएससी के तीन सदस्यों जिसमें अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद और अनीमा हांसदा के नामो का जिक्र किया है। अभय तिवारी ने बताया है कि उसने जेपीएससी की परीक्षा लेनेवाली कंपनी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह के माध्यम से उन सदस्यों तक पैरवी कराई। साथ ही जेपीएससी 11 वीं से लेकर 13वीं सिविल सेवा पीटी में कथित रेट भी तय किए गए थे। जिसमें सामान्य वर्ग यानी जनरल के लिए पांच लाख और एसटी-एससी के लिए दो-तीन लाख रुपये तय थे। वहीं अंतिम परिणाम तक का रेट प्रति अभ्यर्थी 60 से 70 लाख रुपये तय किए गए थे।11वीं से 13वीं सिविल सेवा PT में कथित रेट तय होने का दावा
अभय तिवारी के मुताबिक 11वीं से 13वीं जेपेएससी सिविल सेवा परीक्षा में जमाल अहमद, अजीता भट्टाचार्य और अनीमा हांसदा के साथ-साथ जेपीएससी चेयरमैन से संपर्क कर उसके द्वारा आदित्य पांडेय नाम के व्यक्ति से संपर्क कर अभ्यर्थी उपलब्ध कराए गए। उन अभ्यर्थियों को आदित्य पांडेय ने अजीता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम, टीडीपीएल के निर्देशक रामवीर सिंह, जमाल अहमद, अनीमा हांसदा और चेयरमैन एल खियांग्ते तक पहुंचाया।सात अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का दावा
अब तक जो CID को जानकारी मिली है उसके अनुसार इस सेटिंग गैटिंग में सात अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया है। जिसके एवज में मोटी रकम वसूले गए हैं। साथ ही जानकारी में यह बताया गया है कि इंटरव्यू के जरिए पैसे अजीता भट्टाचार्य के पीए औऱ ब्रजराम को दिये जाते थे। जबकि चेयरमैन एल खियांग्ते किसी धर्मेंद्र नाम के व्यक्ति के माध्य से पैसे लिया करते थे।जमाल अहमद पर दलालों के जरिए सेटिंग कराने का आरोप
वहीं जिस जमाल अहमद का नाम सामने आया है। वह कई दलालों के जरिए अभ्यर्थियों की सेटिंग कराने और इसकी जानकारी टीडीपीएल के निर्देशक को देना का काम करता था। साथ ही जिन तीन सदस्यों का नाम सामने आया है, उसमें बताया गया है कि तीनों टीडीपीएल के प्रमुख रामवीर सिंह पर इंटरव्यू के जरिए अभ्यर्थी के कोड को डी-कोर करवा लेते थे। ताकि जब अभ्यर्थियों का इंटरव्यू किया जाए तो संबंधित अभ्यथी को अपने या भट्टाचार्य के बोर्ड में आवंटित किया जा सके। इससे कथित तौर पर चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने का रास्ता तैयार किया जाता था।अब CID की नजर किन लोगों पर?
पूछताछ में लगातार नए नाम और कथित कड़ियां सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। ऐसे में CID की ओर से कथित तौर पर जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी और दस्तावेजों की जांच की जा सकती है। हालांकि, छापेमारी को लेकर फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले में CID की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पूछताछ में सामने आए आरोपों के समर्थन में क्या ठोस सबूत मिलते हैं और कथित परीक्षा घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका तय होती है। ये भी पढ़ें: पहली JPSC परीक्षा से 14वीं JPSC तक: 2003 में उठा था पहला सवाल, आज आंदोलन तक पहुंची कहानी
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