Ranchi: झारखंड बने 26 साल हो गए। इस दौरान कई सरकारें आईं और गईं, मुख्यमंत्री बदले और प्रशासनिक व्यवस्था में कई प्रयोग हुए। लेकिन राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाएं लगातार विवादों में रही हैं।
कभी रिजल्ट पर सवाल उठा, कभी OMR और मूल्यांकन पर, कभी परीक्षा केंद्र को लेकर अभ्यर्थी परेशान हुए तो कभी प्रश्नपत्र की सुरक्षा पर विवाद हुआ। 2026 में 14वीं JPSC परीक्षा को लेकर उठा विवाद एक बार फिर इसी पुराने सवाल को सामने ले आया है-आखिर भर्ती परीक्षाओं पर युवाओं का भरोसा कब कायम होगा?
विधानसभा से शुरू हुआ नियुक्तियों पर सवाल
झारखंड में नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल केवल JPSC और JSSC तक सीमित नहीं रहे। 2012 में झारखंड विधानसभा में हुई नियुक्तियों और प्रोन्नति को लेकर तत्कालीन राज्यपाल सैयद अहमद ने गंभीर सवाल उठाए थे। इसके बाद पूर्व न्यायाधीश लोकनाथ प्रसाद की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग बनाया गया। जांच के दायरे में नियुक्ति में कथित पक्षपात, विज्ञापन में रिक्त पदों की संख्या, मेधा सूची में कथित गड़बड़ी और चयन प्रक्रिया सहित कई बिंदु शामिल थे। यानी सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता का सवाल झारखंड में आज का नहीं, बल्कि वर्षों पुराना है।JPSC: पहली परीक्षा से 14वीं तक विवादों का सिलसिला
JPSC की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं का इतिहास भी सवालों से भरा रहा है।- पहली परीक्षा (2003): चयन प्रक्रिया और मेरिट सूची में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे।
- दूसरी परीक्षा (2003-05): चयन और इंटरव्यू प्रक्रिया पर सवाल उठे।
- तीसरी परीक्षा (2007-08): परिणाम, मूल्यांकन और चयन को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा।
- चौथी परीक्षा (2009): इंटरव्यू और अंतिम मेरिट सूची पर विवाद हुआ।
- पांचवीं परीक्षा (2012): आरक्षण, उत्तर कुंजी और चयन प्रक्रिया पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई।
- छठी परीक्षा (2016): रिजल्ट में देरी, आंसर की और कॉपियों के मूल्यांकन को लेकर विवाद रहा।
- 7वीं-10वीं परीक्षा (2021-22): OMR, चयन और एक ही केंद्र से सीरियल रोल नंबर वाले अभ्यर्थियों के चयन को लेकर गंभीर आरोप लगे। विरोध-प्रदर्शन भी हुए।
- 11वीं-13वीं परीक्षा (2023-24): तीन परीक्षाओं को क्लब कर 342 पदों पर नियुक्ति की गई, लेकिन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल बने रहे।
- 14वीं परीक्षा (2026): 103 पदों के लिए 19 अप्रैल को PT हुई। रिजल्ट के बाद OMR मूल्यांकन, कटऑफ और पारदर्शिता को लेकर विवाद बढ़ा। जांच की मांग के बीच मामला छात्र आंदोलन का बड़ा मुद्दा बन गया।
14वीं JPSC ने फिर बढ़ाया विवाद
14वीं JPSC के रिजल्ट के बाद अभ्यर्थियों के एक वर्ग ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए। OMR मूल्यांकन और कटऑफ को लेकर पारदर्शिता की मांग हुई। विवाद बढ़ने के बाद मामला सड़क से विधानसभा तक पहुंच गया। अगस्त 2026 में सरकार ने 14वीं JPSC समेत कुछ परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया, लेकिन छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं हुईं। यही वजह है कि आंदोलन जारी रहा।JSSC: यहां भी खत्म नहीं हुआ विवाद
JSSC राज्य के लाखों युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का दूसरा बड़ा माध्यम है। लेकिन यहां भी परीक्षा संचालन, एडमिट कार्ड, केंद्र आवंटन और प्रश्नपत्र से जुड़े विवाद समय-समय पर सामने आए हैं।फील्ड वर्कर परीक्षा में सिर्फ 26% अभ्यर्थी पहुंचे
19 जुलाई 2026 को हुई JSSC फील्ड वर्कर परीक्षा में 3.22 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, लेकिन केवल 86,444 अभ्यर्थी ही परीक्षा में शामिल हुए। कई उम्मीदवारों ने दूर-दराज परीक्षा केंद्र और एडमिट कार्ड से जुड़ी समस्याओं की शिकायत की। इतनी कम उपस्थिति ने परीक्षा प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए।उत्पाद सिपाही परीक्षा भी विवादों में
JSSC उत्पाद सिपाही परीक्षा 2023 से जुड़े मामले में 2026 में बड़ी कार्रवाई हुई। पुलिस ने 159 अभ्यर्थियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया। आरोप था कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे लिए जा रहे थे। हालांकि जांच और JSSC के पक्ष के अनुसार बरामद प्रश्नपत्र वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र से मेल नहीं खाता था। इसलिए इसे सीधे “पेपर लीक साबित” कहना सही नहीं होगा।JSSC-CGL: जब परीक्षा के दौरान बंद हुआ इंटरनेट
JSSC-CGL परीक्षा विवाद भी झारखंड के भर्ती इतिहास का अहम हिस्सा बन चुका है। परीक्षा से जुड़े आरोपों के बाद दोबारा परीक्षा कराई गई। सितंबर 2024 में परीक्षा के दौरान राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने का फैसला लिया गया। इस फैसले की देशभर में चर्चा हुई। मामला बाद में अदालत तक पहुंचा। न्यायिक रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि जांच में संगठित तरीके से मूल प्रश्नपत्र लीक होने का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला था। हालांकि अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे वसूलने से जुड़े साक्ष्य का उल्लेख किया गया।सड़क से विधानसभा तक पहुंचा युवाओं का गुस्सा
2026 में JPSC-JSSC विवाद ने फिर बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया। छात्र परीक्षा रद्द करने, कथित अनियमितताओं की जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। 10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। छात्रों का सवाल सीधा है-जब वे वर्षों तक पढ़ाई कर परीक्षा देते हैं, तो परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी की कीमत आखिर वे ही क्यों चुकाएं?असली सवाल-कब लौटेगा भरोसा?
26 साल में सरकारें बदलीं, आयोगों की कमान बदली और परीक्षाओं के नाम बदले, लेकिन भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद बार-बार लौटता रहा। युवाओं को अब सिर्फ परीक्षा की तारीख नहीं चाहिए। उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए जहां परीक्षा समय पर हो, प्रश्नपत्र सुरक्षित रहे, OMR का निष्पक्ष मूल्यांकन हो, कटऑफ और अंक पारदर्शी हों और शिकायतों का समय पर समाधान मिले। क्योंकि एक परीक्षा रद्द होने का मतलब कई युवाओं के लिए एक और साल की तैयारी है। और यही वजह है कि आज JPSC-JSSC का मुद्दा सिर्फ सरकारी नौकरी की परीक्षा का नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं के भरोसे और भविष्य का सवाल बन चुका है। सरकारें बदलती रहीं, कुर्सियां बदलती रहीं, लेकिन अब युवा पूछ रहा है–भर्ती व्यवस्था कब बदलेगी? ये भी पढ़ें: 51 साल के हेमंत सोरेन: शिबू सोरेन के बेटे से JMM के बॉस तक…जानिए हेमंत सोरेन की अनकही कहानी
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