नई दिल्ली में NEET Paper Leak को लेकर चल रहा आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है। जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन मंगलवार को बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल गया, जहां एक ओर विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुंचे, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास तक अचानक पैदल मार्च निकालकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की।
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि पेपर लीक का मुद्दा अब संसद से सड़क तक देश की राजनीति का प्रमुख विषय बन चुका है।
‘सरकार ने बातचीत के नाम पर समय बर्बाद किया’ – अभिजीत दीपके
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
दीपके का आरोप है कि उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए और उन्हें एक तरह से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर नजरबंद रखा गया। उन्होंने साफ कहा कि अब वे सरकार से बातचीत करने नहीं जाएंगे।
उनके शब्दों में, “अब सरकार को छात्रों के बीच जंतर-मंतर आकर जवाब देना होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि संसद मार्च फिलहाल इसलिए स्थगित किया गया क्योंकि हाल के प्रदर्शन में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई ने आंदोलनकारियों को झकझोर दिया है।
24वें दिन भी अनशन पर सोनम वांगचुक, हाईकोर्ट ने दिया मेदांता शिफ्ट करने का आदेश
इस बीच आंदोलन का सबसे भावनात्मक चेहरा बने सोनम वांगचुक लगातार 24वें दिन भी अनशन पर बने हुए हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। आदेश के बाद मेदांता अस्पताल की दो एंबुलेंस उन्हें लेने जंतर-मंतर पहुंच गईं।
सोमवार को वांगचुक ने कहा था कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई देखने के बाद उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है।
जंतर-मंतर पर विपक्ष का जमावड़ा
दिनभर जंतर-मंतर पर विपक्षी नेताओं का आना-जाना लगा रहा।
NCP (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे। उनके साथ सांसद सुप्रिया सुले ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। वहीं आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल के भी प्रदर्शन स्थल पहुंचने की खबर सामने आई।
विपक्षी नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई।
PM आवास तक कांग्रेस का ‘सीक्रेट मार्च’
उधर कांग्रेस ने भी सरकार पर दबाव बनाने के लिए अलग रणनीति अपनाई।
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई वरिष्ठ नेता पहले कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के सरकारी आवास पहुंचे। सुरक्षा एजेंसियों और मीडिया को लगा कि नेता केवल उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं देने आए हैं।
लेकिन बैठक खत्म होते ही सभी नेता अचानक पैदल प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ गए।
खड़गे के आवास और प्रधानमंत्री आवास के बीच दूरी करीब एक किलोमीटर होने के कारण पुलिस को तैयारी का ज्यादा समय नहीं मिला और कांग्रेस नेता PM आवास के नजदीक पहुंच गए।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता “PM इस्तीफा दो” और “गृहमंत्री इस्तीफा दो” के नारे लगाते रहे।
इस दौरान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
चरणजीत चन्नी बोले – छात्रों की आवाज नहीं सुन रही सरकार
प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की बात सुनने के बजाय बल प्रयोग कर रही है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
सरकार का पक्ष भी आया सामने
उधर NDA संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
सरकार और कांग्रेस के बीच बातचीत की कोशिश
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह कांग्रेस नेताओं से बातचीत करने पहुंचे। राहुल गांधी से चर्चा के बाद वे गृह मंत्री अमित शाह से मिले और फिर दोबारा धरना स्थल लौटे।
हालांकि खबर लिखे जाने तक किसी ठोस सहमति की जानकारी सामने नहीं आई थी।
आंदोलन अब सिर्फ छात्रों का नहीं, राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा
जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन अब छात्र संगठनों के दायरे से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन चुका है। विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है, जबकि केंद्र का कहना है कि दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी और मामले की जांच जारी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार आंदोलनकारियों से सीधे संवाद करती है या यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज होगा।








