NEET Suicide Case : नीट परीक्षा का पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद कई छात्रों में मानसिक तनाव की खबरें सामने आ रही है। परीक्षा रद्द होने के बाद कई छात्र दबाव में है तो कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली है। इसी बीच 20 मई नागपुर की रहने वाली एक छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इससे पहले उसके द्वारा छोड़ा गया सुसाइड नोट सामने आया है। नोट में छात्रा ने अपने माता-पिता से डॉक्टर ना बन पाने के लिए सॉरी कहते हुए फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
NEET Suicide Case: किसान पिता कुक बने, कर्ज लेकर पढ़ाया
मिली जानकारी के मुताबिक मृत छात्रा के पिता कृष्ण कुमार चौबे पेशे से एक साधारण किसान हैं। अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने के सपने को पूरा करने के लिए उनका परिवार नागपुर आ गया था। आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण पिता ने नागपुर में एक कुक (रसोइया) का काम भी शुरू किया। परिवार ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए करीब 3 लाख रुपये का कर्ज लिया था और रिश्तेदारों से भी पैसे उधार लिए थे, ताकि बेटी की पढ़ाई में कोई कमी न रहे।
NEET Suicide Case: नीट विवाद और अनिश्चितता ने दिया मानसिक तनाव
परिजनों के मुताबिक, आकांक्षा ने नीट परीक्षा के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की थी। परीक्षा देने के बाद वह अपने प्रदर्शन से बेहद संतुष्ट थी और उसे पूरा भरोसा था कि इस बार उसका चयन हो जाएगा। लेकिन इसके बाद परीक्षा को लेकर सामने आईं विवादित खबरों, धांधली के आरोपों और अनिश्चितताओं ने उसे गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया।
आकांक्षा के कमरे से मिले सुसाइड नोट में उसका दर्द साफ झलकता है। उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि उन्हें उस पर पूरा भरोसा था कि वह डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब उसमें दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची है। पहले अच्छे अंक आने की उम्मीद थी, पर भविष्य को लेकर वह आश्वस्त नहीं थी।
घटना पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने बढ़ाया मदद का हाथ
इस दुखद घटना के बाद इलाके में आक्रोश है और इस पर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने इसे युवाओं पर बढ़ते मानसिक दबाव और लचर परीक्षा प्रणाली का नतीजा बताया है। कांग्रेस और उससे जुड़े संगठनों के नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। पार्टी की ओर से परिवार को 2.5 लाख रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता दी गई है और उन पर बकाया कर्ज को चुकाने में सहयोग का आश्वासन भी दिया गया है।
फिलहाल, यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि देश के उस एजुकेशन सिस्टम पर बड़ा तमाचा है जहां बच्चे परीक्षा के डर से ज्यादा, सिस्टम की कमियों के कारण टूट रहे हैं।

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