बांग्लादेश: छात्र आंदोलन से सत्ता पलट
बांग्लादेश में हाल ही में कोटा सुधार आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया। सैकड़ों छात्र सड़कों पर उतरे, पुलिस और जनता में टकराव हुआ और हालात इतने बिगड़े कि प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफ़ा देना पड़ा। देश में अंतरिम सरकार बनी लेकिन कानून-व्यवस्था, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और न्याय प्रणाली पर अब भी सवाल बने हुए हैं। यह साफ दिखाता है कि जब युवाओं की आवाज़ दबाई जाती है और संवाद का रास्ता बंद हो जाता है तो आंदोलन सत्ता पलट का कारण भी बन सकता है।
नेपाल: सोशल मीडिया बैन ने बढ़ाई मुश्किलें
नेपाल की स्थिति भी कुछ कम अलग नहीं है। हाल ही में सरकार द्वारा सोशल मीडिया बैन किए जाने के बाद युवाओं का गुस्सा भड़क उठा। भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी के मुद्दों ने भी आग में घी का काम किया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति आवास तक घेराव कर लिया, कई मंत्रियों को इस्तीफ़ा देना पड़ा और पुलिस-जनता में कई जगह झड़पें हुईं। हालात बांग्लादेश जैसे ही नज़र आने लगे हैं। हालांकि नेपाल में लोकतांत्रिक संस्थाएँ अभी सक्रिय हैं और संवाद की गुंजाइश बाकी है, लेकिन अगर सुधार और पारदर्शिता नहीं लाई गई तो संकट गहरा सकता है।
श्रीलंका: आर्थिक संकट का सबक
श्रीलंका पहले ही इसका बड़ा उदाहरण है। 2022 में आर्थिक बदहाली और महंगाई ने जनता को इतना परेशान कर दिया कि राष्ट्रपति भवन तक भीड़ ने कब्ज़ा कर लिया और राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा। IMF की मदद से हालात कुछ हद तक सुधरे हैं, लेकिन जनता का भरोसा पूरी तरह लौट नहीं पाया है। श्रीलंका की कहानी बताती है कि आर्थिक प्रबंधन की गलती और भ्रष्टाचार किसी भी देश को राजनीतिक संकट में धकेल सकता है।
भारत के पड़ोस में संकटों का जाल
इन तीनों देशों के अलावा पाकिस्तान, म्यांमार, अफ़ग़ानिस्तान और मालदीव भी अलग-अलग तरह की अस्थिरताओं से जूझ रहे हैं। पाकिस्तान में आर्थिक संकट और राजनीतिक टकराव है, म्यांमार में सेना और नागरिकों के बीच खूनी संघर्ष जारी है, अफ़ग़ानिस्तान तालिबान राज में मानवाधिकार संकट से घिरा है और मालदीव चीन-भारत की भू-राजनीतिक खींचतान का मैदान बन चुका है।
भारत क्यों सबसे अलग?
इन सबके बीच भारत की तस्वीर बिल्कुल अलग है। चारों तरफ संकट से घिरे होने के बावजूद भारत आज भी दक्षिण एशिया का सबसे स्थिर और मज़बूत लोकतंत्र है। इसकी वजह है मज़बूत लोकतांत्रिक संस्थाएँ, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विविध समाज को साथ लेकर चलने की क्षमता और वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय भूमिका। यही कारण है कि जहाँ पड़ोसी देश अस्थिरता और विद्रोह से जूझ रहे हैं, वहीं भारत अपने नागरिकों के भरोसे और संस्थागत ताकत के दम पर शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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