Breaking News: चाईबासा जिले में प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के तीन प्रमुख नक्सली कैडरों सालूका कायम, पिंकी और कोदोमुनी कोड़ा ने सरेंडर किया है। बता दे कि पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले तीन माओवादी कैडरों का आपराधिक रिकॉर्ड बेहद गंभीर रहा है। पुलिस के अनुसार, तीनों के खिलाफ कुल 109 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमेटी सदस्य सालुका कायम के खिलाफ अकेले 96 मामले दर्ज हैं, जो उसे क्षेत्र के सक्रिय और वांछित माओवादी नेताओं में शामिल करते हैं।
Breaking News: 26 बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल था नक्सली
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सालुका कायम 26 बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहा है। इन मामलों में सुरक्षा बलों पर आईईडी विस्फोट, पुलिस के साथ मुठभेड़, ग्रामीणों की हत्या, रेलवे ट्रैक को विस्फोट से क्षतिग्रस्त करना और सड़क व अन्य निर्माण कार्यों में लगी मशीनों को आग के हवाले करने जैसी गंभीर वारदातें शामिल हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2021 में लांजी जंगल में हुए आईईडी विस्फोट में भी सालुका कायम की संलिप्तता सामने आई थी। इस हमले में झारखंड जगुआर के तीन जवान शहीद हुए थे, जबकि तीन अन्य घायल हो गए थे। इसके अलावा वर्ष 2023 में तुम्बाहाका पहाड़ी पर सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में झारखंड जगुआर के सब-इंस्पेक्टर अमित तिवारी और आरक्षी गौतम कुमार शहीद हुए थे। पुलिस का दावा है कि इस घटना में भी सालुका कायम की भूमिका रही थी। Read More- Breaking News: माफिया अतीक अहमद के दोनों बेटों को मिली पेरोल, छोटे भाई अबान के जनाजे में होंगे शामिलBreaking News: रेलवे ट्रैक को उड़ाने, ग्रामीणों की हत्या समेत कई मामले दर्ज
पुलिस रिकॉर्ड में वर्ष 2022 और 2023 के दौरान गोइलकेरा और टोंटो क्षेत्र में हुए कई आईईडी विस्फोटों का भी उल्लेख है। इन घटनाओं में सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन के कई जवान घायल हुए थे। इसके अलावा रेलवे ट्रैक को उड़ाने, ग्रामीणों की हत्या, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और निर्माण कार्य में लगी मशीनों में आग लगाने जैसे कई मामले भी दर्ज हैं। Read More- Breaking News: पटना में बवाल-युवक की मौत के बाद भड़की भीड़ ने 10 वाहनों को फूंका पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार चलाए जा रहे अभियान और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण संगठन के कई सक्रिय सदस्य आत्मसमर्पण का रास्ता अपना रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन माओवादियों का सरेंडर संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। चाईबासा और आसपास के इलाकों में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी है। पुलिस का उद्देश्य संगठन के शेष कैडरों को मुख्यधारा से जोड़ना और पूरे क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त करना है।
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