J&K: शनिवार रात जम्मू-कश्मीर के पुंछ और किश्तवाड़ में बादल फटने से अब तक 11 लोगों की मौत और कई लोग घायल बताए जा रहे है। मौजूदा स्थिती में यह जानकारी मिल रही है कि पुंछ के सुरनकोट में लैंडस्लाइट से एक मकान मलबे में दब गया है। जब लैंडस्लाइट हुआ उस वक्त घर में 8 लोग थे। इनमें 2 साल की सोफिया यासिर समेत 5 लोगों के शव बरामद किए जा चुके है। वहीं किश्तवाड़ के सुर्नू इलाके से जानकारी यह आ रही है कि यहां बादल फटने से लोगों के घरों और खेतों को काफी नुकसान हुआ है।
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धारहाल नहीं का जलस्तर बढ़ा
इधर राजौरी में भारी बारिश के बाद से धारहाल नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है। जिससे वहां के 200 से ज्यादा गाड़िया बह गई है। वहीं जम्मू-कश्मीर के पुंछ में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ को देखते हुए पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। लोगों को नदियों और नालों से दूर रहने, बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलने और बेहद जरूरी न हो तो सड़कों पर गाड़ी न चलाने की अपील की गई है।
गृह मंत्री ने ली स्थिती की समीक्षा
वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के साथ लगातार हो रही, भारी बारिश से पैदा हुई बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की है। राजौरी ज़िले में अचानक आई बाढ़ के बाद, अमित शाह ने राहत और बचाव कार्यों के लिए केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन से संपर्क किया। X पर एक पोस्ट करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारी बारिश से पैदा हुए हालात के बारे में जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बात की और उन्हें केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
बादल फटने की सबसे बड़ी वजह हिमायल की ऊंची पर्वत है
मौसम विभाग के अनुसार जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की सबसे बड़ी वजह हिमायल की ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं है। बताया जा रहा है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी भरी हवाएं इन पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती है। ऊपर जाते ही हवा ठंडी हो जाती है औऱ उसमें मौजूद नमी तेजी से बादलों में जमा होने लगती है। इसके अलावे संकरी घाटियां, ऊंची चोटियां बादलों को एक जगह रोक देती है। इससे कम क्षेत्र में बहुंच ज्यादा नमी इकट्ठी हो जाती है। जब बादल इतना पानी संभाल नहीं पाते तो अचानक बेहद तेज बारिश होती है। यही वजह है कि डोड, किश्तवाड़, रामबन, पुंछ, राजौरी, सोनमर्ग और कश्मीर घाटी के ऊंचे इलाकों में बादल फटे की घटनाएं मैदानी क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा होती है।









