धनबाद : बलिया के पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष व सिंह मेंशन के मजबूत स्तंभ रामधीर सिंह की किस्मत का फैसला 14 दिनों में तय हो जाएगा.हाईकोर्ट में रामधीर सिंह की याचिका पर शुक्रवार को अंतिम सुनवाई पूरी हो गई.डबल बेंच में शामिल जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस नवनीत कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया.रामधीर ने झारखंड हाईकोर्ट में विनोद सिंह हत्याकांड में सेशन कोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी.15 जुलाई 1998 को कतरास के हटिया शहीद भगत सिंह चौक के पास मजदूर नेता सकलदेव सिंह के भाई विनोद सिंह व उनके चालक मन्नू अंसारी पर अंधाधुंध फायरिंग कर दोनों को मौत के घाट उतार दिया गया था.
18 अप्रैल 2015 को रामधीर की गैर मौजूदगी में धनबाद के सत्र न्यायालय ने विनोद और उनके चालक की हत्या में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 22 महीने फरार रहने के बाद 20 फरवरी 2017 को रामधीर ने धनबाद कोर्ट में सरेंडर किया था.साढ़े छह साल से वे रांची की होटवार जेल में बंद हैं.रामधीर और उनके भतीजे संजीव सिंह के जेल में बंद रहने के कारण स्व. सूर्यदेव सिंह का सिंह मेंशन कई कुनबों में बंट चुका है.रामधीर अपने दूसरे भाई राजन सिंह के पुत्र नीरज की हत्या से ठीक पहले सरेंडर कर जेल गए थे.मेंशन से रघुकुल पहले ही अलग हो चुका है.संजीव और नीरज के बीच झरिया के चुनाव में रामधीर खुलकर संजीव के साथ थे.
रामधीर के जेल जाने के बाद से उनकी पत्नी व पूर्व मेयर इंदू देवी मेंशन से अलग रह रही हैं.इंदू संजीव सिंह की मां व झरिया की पूर्व विधायक कुंती देवी की गोतनी के साथ सगी बहन भी हैं.लेकिन पिछले दिनों नगर निगम चुनाव के लिए मेयर की सीट महिला के लिए रिजर्व होने के बाद दोनों बहनें आमने-सामने आ गई थीं.हाईकोर्ट रामधीर को रिहा करेगा या फिर सेशन कोर्ट का फैसला बहाल रखा जाएगा.यह देखना दिलचस्प होगा.
इस फैसले पर सिंह मेंशन और रघुकुल ही नहीं बल्कि धनबाद से लेकर यूपी तक के लोगों की निगाहें टिकी हैं.रामधीर सिंह से जुड़े फैसले पर ही उनके पुत्र शशि सिंह का भी किस्मत टिका है. शशि सिंह कोयला किंग सुरेश सिंह हत्याकांड में करीब 12 साल से फरार है.