--सरहुल पर्व प्राकृतिक का पूजा है: अनूप कुजूर
--सरहुल पर्व हमारी संस्कृति, सभ्यता, एकता को बनाए रखने का संदेश देता है: बालेश्वर मुंडा
कोडरमा। आदिवासियों का महापर्व सरहुल को लेकर मंगलवार को झारखंड के हर कोने में धूम देखी गयी। वहीं कोडरमा में भी सरहुल महापर्व धूमधाम से मनाया गया। सरहुल पर्व को लेकर लखीबागी स्थित सरना स्थल पर बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग इकट्ठा होकर पारंपरिक वेशभूषा में पारंपरिक नृत्य करते हुए लोगों ने सरहुल की खुशी का इजहार किया। सरना स्थल पर पूजा के बाद विभिन्न कमेटियों की ओर से आकर्षक झांकी निकाली गई और अलग-अलग सरहुल कमेटियों ने बारी-बारी से पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। जिसके बाद सरना स्थल से कोडरमा के रास्ते बड़कीबागी होत हुए सभा स्थल डेंगरापहाड़ के समीप पहुंची।
इस शोभायात्रा में विभिन्न गांवों के सरना समितियों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में ढोल नगाड़ों के साथ झूमते नाचते हुए पहुंचे। इस दौरान हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के युवक-युवतियां शोभायात्रा में झूमते नजर आए। इस मौके पर मुख्य अतिथि जिला कल्याण पदाधिकारी अनूप कुजूर ने कहा कि सरहुल पर्व प्राकृतिक का पूजा है, हम कामना करते हैं कि पहले वर्ष की भांति इस वर्ष भी अच्छी बारिश हो और अच्छा फसल हो। वहीं मुख्य अतिथि के रूप उपस्थित लघु सिंचाई के कार्यपालक पदाधिकारी बालेश्वर मुंडा ने कहा कि सरहुल पर्व आदिवासियों का सबसे बड़ा पर्व है। यह पर्व हमारी संस्कृति, सभ्यता, एकता को बनाए रखने का संदेश देता है। यह पर्व जल, जंगल, जमीन की रक्षा करने का संदेश देता है। यह पर्व प्राकृति से लगाव का संदेश देता है।
वहीं कमेटी के अध्यक्ष पवन माइकल कुजूर ने कहा कि सरहुल दो शब्दों से मिलकर बना है, सर का मतलब सरय का फूल और हुल का मतलब क्रांति। जल जंगल जमीन को बचाने लिए हम क्रांति करते हैं। हमलोग प्रकृति की पूजा करते हैं और हम सभी प्राकृति को धन्यवाद देते है कि आपके द्वारा ही हम सभी धरती पर जिंदा है। सभा स्थल पर विभिन्न सरना समितियों के द्वारा एक से बढ़कर एक प्राकृतिक नृत्य प्रस्तुत की गई। अंत में सभी सरना समितियों को पुरस्कृत किए गया। वहीं शोभायात्रा के दौरान गांधी चैक के समीप समाजसेवी विनय कुमार सिंह द्वारा शरबत और पानी की व्यवस्था की गई थी। वहीं काॅलेटेक्स के समीप मंगलम हाॅस्पिटल झुमरीतिलैया द्वारा भी पानी और शरबत की व्यवस्था की गई थी।

मौके पर सचिव अनिल हसदा, कोषाध्यक्ष बिरजामीन हसदा, अनूप कुजूर, डाॅ. विमल प्रसाद, रीमिस हेम्ब्रम, विनोद उरांव, जोसेफ टोप्पो, अनिल हांसदा, तुरण टोपनो, पोलीकाॅर्प तिर्की, विपिन किशोर टोप्पो, देवनीश एक्का, रौशनी केरकेटा, बेंजामीन एक्का समेत सैकड़ों आदिवासी समुदाय महिलाएं, पुरुष व बच्चे उपस्थित थे।